असम के हाजो में श्री हयग्रीव माधव मंदिर: एक अद्वितीय धार्मिक स्थल
असम के हाजो में स्थित श्री हयग्रीव माधव मंदिर न केवल अपनी वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि इसकी अनोखी परंपराएं भी इसे खास बनाती हैं। यहां भक्त भगवान श्रीविष्णु को प्रसन्न करने के लिए कछुए का चढ़ावा अर्पित करते हैं। इस मंदिर का बौद्ध धर्म से भी गहरा संबंध है, जहां तिब्बती बौद्ध अनुयायी भी आते हैं। जानें इस मंदिर के इतिहास, पौराणिक महत्व और अनूठी परंपराओं के बारे में।
| Mar 25, 2026, 16:29 IST
मंदिर का ऐतिहासिक महत्व
भारत के असम राज्य के कामरूप जिले में स्थित श्री हयग्रीव माधव मंदिर अपनी वास्तुकला और अनोखी परंपराओं के लिए प्रसिद्ध है। मणिकूट पर्वत पर स्थित यह मंदिर सदियों से बौद्ध और हिंदू धर्म के अनुयायियों के लिए आस्था का केंद्र रहा है। यहां भक्त भगवान श्रीविष्णु को प्रसन्न करने के लिए कछुए का चढ़ावा अर्पित करते हैं। इस लेख में हम इस मंदिर के महत्व, इसकी अनूठी परंपरा और बौद्ध धर्म से इसके संबंध के बारे में चर्चा करेंगे।
मंदिर का पौराणिक महत्व
इस मंदिर का इतिहास प्राचीन है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, यहां भगवान श्रीविष्णु के 'हयग्रीव' अवतार की पूजा की जाती है। कहा जाता है कि श्रीविष्णु ने इसी स्थान पर मधु और कैटभ नामक राक्षसों का वध किया था।
इस मंदिर का निर्माण 1583 में कोच राजा रघुदेव नारायण द्वारा किया गया था, जबकि कुछ लोग इसे 100 साल से भी अधिक पुरानी ध्वस्त मंदिर का पुनर्निर्माण मानते हैं। यह पत्थरों से बना है और इसकी दीवारों पर हाथियों और अन्य पौराणिक आकृतियों की सुंदर नक्काशी की गई है।
अनूठी परंपरा
इस मंदिर की विशेषता 'माधव पुखरी' तालाब है, जिसमें दुर्लभ प्रजातियों के कछुए रहते हैं। यहां की परंपरा है कि भक्त अपनी इच्छाओं की पूर्ति पर या भगवान को श्रद्धा अर्पित करने के लिए कछुओं को खाना खिलाते हैं या तालाब में उन्हें छोड़ते हैं। इन कछुओं को भगवान विष्णु के कूर्म अवतार के रूप में देखा जाता है। स्थानीय लोग इनकी सुरक्षा का विशेष ध्यान रखते हैं।
बौद्ध धर्म से संबंध
हयग्रीव माधव मंदिर की एक और विशेषता यह है कि यहां हिंदू धर्म के अनुयायियों के साथ-साथ बौद्ध अनुयायी भी आते हैं। तिब्बती बौद्धों का मानना है कि यह वही स्थान है, जहां भगवान बुद्ध ने निर्वाण प्राप्त किया था। इसलिए बौद्ध अनुयायी इस मंदिर को 'महामुनि' का मंदिर मानते हैं।
श्री हयग्रीव माधव मंदिर संस्कृति, धर्म और वन्यजीव संरक्षण का एक अनूठा उदाहरण प्रस्तुत करता है। यहां की शांति और सदियों पुरानी परंपराएं इसे भारत के अन्य मंदिरों से अलग बनाती हैं। यदि आप असम की यात्रा पर हैं, तो हाजो के इस प्रसिद्ध मंदिर के दर्शन करना न भूलें।
