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ईरान ने यूरोपीय संघ की सेनाओं को आतंकवादी घोषित किया, परमाणु तनाव में वृद्धि

ईरान ने यूरोपीय संघ की नौसेना और वायु सेना को आतंकवादी घोषित कर दिया है, जो कि 2019 में ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स को आतंकवादी संगठन मानने के जवाब में है। इस निर्णय ने दोनों पक्षों के बीच कूटनीतिक तनाव को बढ़ा दिया है। ईरान का कहना है कि यह कदम अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है। अमेरिका और इजरायल ईरान पर यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम को रोकने के लिए दबाव बना रहे हैं। जानिए इस मुद्दे की पूरी जानकारी।
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ईरान ने यूरोपीय संघ की सेनाओं को आतंकवादी घोषित किया, परमाणु तनाव में वृद्धि

ईरान का नया निर्णय

नई दिल्ली: ईरान ने यूरोपीय संघ के सदस्य देशों की नौसेना और वायु सेना को आतंकवादी संगठन के रूप में मान्यता दी है। यह निर्णय 2019 में यूरोपीय संघ द्वारा ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को आतंकवादी घोषित करने के जवाब में लिया गया है।


अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन

ईरान के विदेश मंत्रालय का बयान:
ईरान ने कहा है कि यूरोपीय संघ द्वारा आईआरजीसी के खिलाफ उठाए गए कदम संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून के मूल सिद्धांतों के खिलाफ हैं। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि यह निर्णय पारस्परिक प्रतिक्रिया के तहत लिया गया है। 2019 में अमेरिका द्वारा आईआरजीसी को आतंकवादी घोषित करने के बाद ईरान ने इस कदम को उठाया है।


आतंकवादी संगठनों की सूची में शामिल

यूरोपीय संघ की कार्रवाई:
यूरोपीय संघ द्वारा आईआरजीसी को आतंकवादी संगठन के रूप में मान्यता देने के बाद इसे इस्लामिक स्टेट और अल-कायदा जैसी संगठनों की श्रेणी में रखा गया है। इस निर्णय के परिणामस्वरूप दोनों पक्षों के बीच कूटनीतिक तनाव और बढ़ गया है।


आईआरजीसी की भूमिका

1979 की इस्लामी क्रांति के बाद:
आईआरजीसी की स्थापना ईरान की शिया धार्मिक व्यवस्था की रक्षा के लिए की गई थी। समय के साथ, इस संगठन ने देश की अर्थव्यवस्था और सशस्त्र बलों में महत्वपूर्ण प्रभाव स्थापित किया है। यह ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल और परमाणु कार्यक्रमों की देखरेख में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।


अमेरिका और इजरायल का दबाव

यूरेनियम संवर्धन पर दबाव:
अमेरिका, इजरायल और उनके सहयोगी देश ईरान पर यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम को रोकने के लिए दबाव बना रहे हैं। इन देशों ने ईरान पर परमाणु हथियार विकसित करने के प्रयासों को लेकर चिंता व्यक्त की है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान को चेतावनी दी है कि वह 10 से 15 दिनों के भीतर परमाणु समझौते पर सहमति बनाए, अन्यथा गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।