गंगा सप्तमी: महत्व, तिथि और पूजा विधि
गंगा सप्तमी, जो हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र मानी जाती है, मां गंगा के धरती पर अवतरण का प्रतीक है। इस दिन भक्तजन स्नान, दान और पूजा करके पुण्य अर्जित करते हैं। 2026 में गंगा सप्तमी की तिथि और पूजा विधि के बारे में जानें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन गंगा स्नान से पापों से मुक्ति और मोक्ष का अवसर मिलता है। जानें इस पर्व का महत्व और विशेष पूजा विधि।
| Apr 22, 2026, 12:33 IST
गंगा सप्तमी का महत्व
हिंदू धर्म में गंगा सप्तमी को अत्यंत पवित्र माना जाता है। इस दिन मां गंगा का धरती पर अवतरण होता है। भक्तजन इस अवसर पर स्नान, दान और पूजा करके पुण्य प्राप्त करते हैं। वर्ष 2026 में सप्तमी तिथि को लेकर कुछ भ्रम है, लेकिन पंचांग के अनुसार सही तिथि निर्धारित हो चुकी है। गंगा सप्तमी का दिन आध्यात्मिक शुद्धि और पितृ शांति के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। आइए जानते हैं गंगा सप्तमी की तिथि, मुहूर्त, पूजा विधि और धार्मिक महत्व के बारे में...
गंगा सप्तमी का पर्व
द्रिक पंचांग के अनुसार, 22 अप्रैल 2026 की रात 10:50 बजे सप्तमी तिथि की शुरुआत होगी। वहीं, 23 अप्रैल की रात 08:50 बजे यह तिथि समाप्त होगी। उदयातिथि के अनुसार, 23 अप्रैल 2026 को गंगा सप्तमी का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन लोग गंगा स्नान और पूजा करते हैं।
धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां गंगा इस दिन स्वर्ग से पृथ्वी पर आई थीं। पौराणिक कथा के अनुसार, राजा भगीरथ की तपस्या से प्रसन्न होकर मां गंगा धरती पर अवतरित हुईं। भगवान शिव ने उन्हें अपनी जटाओं में धारण किया और फिर वे पृथ्वी पर प्रवाहित हुईं। गंगा स्नान से जन्म-जन्मांतर के पापों से मुक्ति मिलती है, जीवन में शुद्धता आती है, और जातक को मोक्ष का अवसर भी मिलता है।
पूजन विधि
इस दिन सुबह जल्दी स्नान करके सूर्य देव को जल अर्पित करें। घर के मंदिर में मां गंगा का ध्यान किया जाता है। 'ऊँ नमो गंगायै विश्वरूपिणी नारायणी नमो नमः' मंत्र का जप विशेष फल देता है। शाम को दीपक जलाकर पूजा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इस दिन किया गया छोटा सा पुण्य भी कई गुना फल देता है।
महाउपाय
पितृ दोष से मुक्ति पाने के लिए यह दिन अत्यंत प्रभावी माना जाता है। सुबह स्नान के समय गंगाजल मिलाकर शुद्धिकरण किया जाता है। इसके बाद तांबे के पात्र में जल लेकर काले तिल और कुशा के साथ पूर्वजों का तर्पण किया जाता है। गरीबों को वस्त्र, अन्न और भोजन का दान करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है। इस दिन भगवान शिव और मां गंगा की पूजा-आराधना विशेष फलदायी मानी जाती है।
