गुरुवार को भगवान विष्णु की पूजा का महत्व और विष्णु चालीसा के लाभ
गुरुवार का दिन भगवान श्रीहरि विष्णु को समर्पित होता है, जब भक्तजन उनकी पूजा करते हैं। इस दिन की पूजा से इच्छाएं पूरी होती हैं और धन-धान्य में वृद्धि होती है। नियमित रूप से विष्णु चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति को तनाव, चिंता, और रोगों से मुक्ति मिलती है। इसके अलावा, यह आर्थिक स्थिरता और सफलता भी प्रदान करता है। जानें विष्णु चालीसा के पाठ के लाभ और इसके महत्व के बारे में इस लेख में।
| Apr 23, 2026, 11:59 IST
भगवान विष्णु की पूजा का महत्व
हिंदू धर्म में गुरुवार का दिन भगवान श्रीहरि विष्णु को समर्पित है। इस दिन भक्तजन व्रत रखते हैं और भगवान विष्णु की पूजा करते हैं। इस दिन की पूजा से जातक की इच्छाएं शीघ्र पूरी होती हैं और भगवान विष्णु की कृपा से धन-धान्य में वृद्धि होती है। यदि आप भी भगवान विष्णु का आशीर्वाद पाना चाहते हैं, तो नियमित रूप से विष्णु चालीसा का पाठ करना चाहिए।
विष्णु चालीसा का पाठ
जो व्यक्ति नियमित रूप से विष्णु चालीसा का पाठ करता है, उसके जीवन में सुख और सौभाग्य की वृद्धि होती है। इस लेख में हम विष्णु चालीसा के पाठ के महत्व और इसके लाभों के बारे में चर्चा करेंगे।
दोहा
विष्णु सुनिए विनय सेवक की चितलाय ।
कीरत कुछ वर्णन करूं दीजै ज्ञान बताय ॥
नमो विष्णु भगवान खरारी, कष्ट नशावन अखिल बिहारी ।
प्रबल जगत में शक्ति तुम्हारी, त्रिभुवन फैल रही उजियारी ॥
सुन्दर रूप मनोहर सूरत, सरल स्वभाव मोहनी मूरत ।
तन पर पीताम्बर अति सोहत, बैजन्ती माला मन मोहत ॥
शंख चक्र कर गदा विराजे, देखत दैत्य असुर दल भाजे ।
सत्य धर्म मद लोभ न गाजे, काम क्रोध मद लोभ न छाजे ॥
सन्तभक्त सज्जन मनरंजन, दनुज असुर दुष्टन दल गंजन ।
सुख उपजाय कष्ट सब भंजन, दोष मिटाय करत जन सज्जन ॥
पाप काट भव सिन्धु उतारण, कष्ट नाशकर भक्त उबारण ।
करत अनेक रूप प्रभु धारण, केवल आप भक्ति के कारण ॥
धरणि धेनु बन तुमहिं पुकारा, तब तुम रूप राम का धारा ।
भार उतार असुर दल मारा, रावण आदिक को संहारा ॥
आप वाराह रूप बनाया, हिरण्याक्ष को मार गिराया ।
धर मत्स्य तन सिन्धु बनाया, चौदह रतनन को निकलाया ॥
अमिलख असुरन द्वन्द मचाया, रूप मोहनी आप दिखाया ।
देवन को अमृत पान कराया, असुरन को छवि से बहलाया ॥
कूर्म रूप धर सिन्धु मझाया, मन्द्राचल गिरि तुरत उठाया ।
शंकर का तुम फन्द छुड़ाया, भस्मासुर को रूप दिखाया ॥
वेदन को जब असुर डुबाया, कर प्रबन्ध उन्हें ढुढवाया ।
मोहित बनकर खलहि नचाया, उसही कर से भस्म कराया ॥
असुर जलन्धर अति बलदाई, शंकर से उन कीन्ह लड़ाई ।
हार पार शिव सकल बनाई, कीन सती से छल खल जाई ॥
सुमिरन कीन तुम्हें शिवरानी, बतलाई सब विपत कहानी ।
तब तुम बने मुनीश्वर ज्ञानी, वृन्दा की सब सुरति भुलानी ॥
देखत तीन दनुज शैतानी, वृन्दा आय तुम्हें लपटानी ।
हो स्पर्श धर्म क्षति मानी, हना असुर उर शिव शैतानी ॥
तुमने ध्रुव प्रहलाद उबारे, हिरणाकुश आदिक खल मारे ।
गणिका और अजामिल तारे, बहुत भक्त भव सिन्धु उतारे ॥
हरहु सकल संताप हमारे, कृपा करहु हरि सिरजन हारे ।
देखहुं मैं निज दरश तुम्हारे, दीन बन्धु भक्तन हितकारे ॥
चाहता आपका सेवक दर्शन, करहु दया अपनी मधुसूदन ।
जानूं नहीं योग्य जब पूजन, होय यज्ञ स्तुति अनुमोदन ॥
शीलदया सन्तोष सुलक्षण, विदित नहीं व्रतबोध विलक्षण ।
करहुं आपका किस विधि पूजन, कुमति विलोक होत दुख भीषण ॥
करहुं प्रणाम कौन विधिसुमिरण, कौन भांति मैं करहु समर्पण ।
सुर मुनि करत सदा सेवकाई, हर्षित रहत परम गति पाई ॥
दीन दुखिन पर सदा सहाई, निज जन जान लेव अपनाई ।
पाप दोष संताप नशाओ, भव बन्धन से मुक्त कराओ ॥
सुत सम्पति दे सुख उपजाओ, निज चरनन का दास बनाओ ।
निगम सदा ये विनय सुनावै, पढ़ै सुनै सो जन सुख पावै ॥
॥ इति श्री विष्णु चालीसा ॥
विष्णु चालीसा के लाभ
विष्णु चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति को तनाव और चिंता से मुक्ति मिलती है। इसके नियमित पाठ से स्वास्थ्य में सुधार होता है और रोगों से बचाव होता है। आर्थिक स्थिरता और सफलता भी प्राप्त होती है। जो लोग विष्णु चालीसा का नियमित पाठ करते हैं, उन्हें शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है। इसके अलावा, यह पूर्व जन्म के पापों का नाश करता है और व्यक्ति को सांसारिक बंधनों से मुक्ति दिलाता है, जिससे मोक्ष की प्राप्ति होती है।
