Newzfatafatlogo

चैती छठ: संध्या अर्घ्य का महत्व और पूजा विधि

चैती छठ का पर्व आज 24 मार्च 2026 को मनाया जा रहा है, जिसमें भक्त संध्या अर्घ्य अर्पित करेंगे। यह पर्व सूर्य देव और छठी मैया की आराधना का प्रतीक है, जो परिवार की सुख-समृद्धि और स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है। जानें संध्या अर्घ्य का समय, पूजा विधि और इसके धार्मिक महत्व के बारे में।
 | 
चैती छठ: संध्या अर्घ्य का महत्व और पूजा विधि

चैती छठ का संध्या अर्घ्य


नई दिल्ली: आज 24 मार्च 2026, मंगलवार को चैती छठ का संध्या अर्घ्य अर्पित किया जाएगा। भक्त सूर्य देव और छठी मैया की पूजा करते हुए डूबते सूर्य को अर्घ्य देंगे। यह पर्व परिवार की समृद्धि, स्वास्थ्य और सकारात्मकता के लिए मनाया जाता है। घाटों पर भक्ति गीतों और अर्घ्य की रोशनी से वातावरण दिव्य हो जाता है। व्रती इस पर्व को श्रद्धा और सादगी के साथ मनाते हैं।


चैती छठ, जो चैत्र महीने में आता है, सूर्य की शक्ति और प्रकृति के प्रति आस्था को दर्शाता है। आज के संध्या अर्घ्य के साथ भक्त कई घंटों का कठिन व्रत रखते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से किया गया यह व्रत जीवन में सुख, शांति और प्रगति लाता है। यह उत्सव परिवार को एकजुट रखता है और सकारात्मक माहौल बनाता है।


संध्या अर्घ्य का समय और मुहूर्त

आज 24 मार्च 2026 को चैती छठ का संध्या अर्घ्य शाम 6:40 बजे दिया जाएगा, जब सूर्य अस्त होगा। व्रती जल में खड़े होकर सूर्य को जल, दूध और प्रसाद अर्पित करेंगे। यह परंपरा सूर्य की अंतिम किरणों को धन्यवाद देने की है। घाटों पर भक्तों की भीड़ और भजन-कीर्तन का माहौल अद्भुत होता है। यह समय परिवार की खुशहाली के लिए बहुत शुभ माना जाता है।


उषा अर्घ्य का समय

छठ पूजा का अंतिम अर्घ्य कल 25 मार्च 2026 को सुबह 5:47 बजे उगते सूर्य को दिया जाएगा। इस अर्घ्य के साथ व्रत पूरा होगा। भक्त पूरी श्रद्धा से सूर्य देव और छठी मैया का आशीर्वाद लेंगे। मान्यता है कि उषा अर्घ्य से जीवन में स्वास्थ्य, शांति और समृद्धि बनी रहती है। यह क्षण हर व्रती के लिए भावुक और यादगार होता है।


संध्या अर्घ्य की पूजा विधि

आज संध्या अर्घ्य के समय व्रती नदी, तालाब या घाट पर पानी में खड़े होकर पूजा करेंगे। बांस के सूप में ठेकुआ, फल, नारियल, गन्ना और शुद्ध प्रसाद सजाया जाता है। साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा जाता है और पारंपरिक छठ गीत गाए जाते हैं। भक्त सूर्य को जल चढ़ाते हुए परिवार की मंगल कामना करते हैं। यह विधि पूरी सादगी और शुद्धता पर आधारित है।


संध्या अर्घ्य का धार्मिक महत्व

संध्या अर्घ्य छठ पूजा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसमें सूर्य देव को धन्यवाद दिया जाता है। सूर्य को जीवन का आधार मानकर उनकी पूजा से ऊर्जा, सफलता और अच्छा स्वास्थ्य मिलता है। यह पर्व प्रकृति की उपासना भी सिखाता है। सच्ची श्रद्धा से किया गया अर्घ्य नकारात्मकता को दूर कर जीवन में सकारात्मक बदलाव लाता है।


छठ व्रत में ध्यान रखने योग्य बातें

छठ व्रत के दौरान पवित्रता और नियमों का सख्ती से पालन आवश्यक है। व्रती घर की सफाई रखते हैं, सात्विक भोजन बनाते हैं और अलग बर्तनों का इस्तेमाल करते हैं। मन को शांत रखना और नकारात्मक विचारों से दूर रहना चाहिए। पूरी अनुशासन के साथ व्रत करने पर छठी मैया का आशीर्वाद मिलता है, जो सुख-शांति बनाए रखता है।