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चैत्र नवरात्रि: मां स्कंदमाता की पूजा और विशेष संयोग

चैत्र नवरात्रि के पांचवे दिन मां स्कंदमाता की पूजा का विशेष महत्व है। जानें इस दिन के शुभ संयोग और मां की पूजा विधि के बारे में। मां स्कंदमाता का संबंध विशुद्ध चक्र से है, जो वाणी और अभिव्यक्ति से जुड़ा है। इस लेख में मां स्कंदमाता को प्रसन्न करने के लिए मंत्र और साधना विधि भी साझा की गई है।
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चैत्र नवरात्रि: मां स्कंदमाता की पूजा और विशेष संयोग

मां स्कंदमाता का महत्व


चैत्र नवरात्रि के पांचवे दिन, भक्त मां दुर्गा के पांचवे स्वरूप, मां स्कंदमाता की पूजा करते हैं। स्कंदमाता का अर्थ है भगवान कार्तिकेय की माता, जो अपने पुत्र कार्तिकेय को गोद में लिए हुए हैं। मां कमल के फूल पर विराजमान होती हैं, इसलिए उन्हें पद्मासना देवी भी कहा जाता है। मान्यता है कि जो भक्त मां स्कंदमाता की आराधना करता है, उसे भगवान कार्तिकेय का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है।


विशेष शुभ संयोग

इस वर्ष नवरात्रि के पांचवे दिन एक विशेष शुभ संयोग बन रहा है। आज सर्वार्थसिद्धि योग और रवि योग का निर्माण हो रहा है। सर्वार्थसिद्धि योग रात 8:49 बजे से प्रारंभ होकर अगले दिन सुबह 6:21 बजे तक रहेगा।


मां स्कंदमाता की पूजा विधि

मां स्कंदमाता की पूजा के लिए कुछ सरल नियमों का पालन करना आवश्यक है। सबसे पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें, यदि संभव हो तो पीले रंग के कपड़े धारण करें। पूजा स्थल को साफ करें और मां की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। इसके बाद घी का दीपक जलाएं और मां को पीले फूल अर्पित करें। उन्हें पीले रंग के भोग जैसे केले या मिठाई अर्पित करें। पूजा के अंत में अपनी मनोकामना, विशेषकर संतान सुख से जुड़ी प्रार्थना अवश्य करें। ऐसा करने से परिवार में सुख, शांति और समृद्धि आती है।


विशुद्ध चक्र का संबंध

तंत्र साधना के अनुसार, मां स्कंदमाता का संबंध विशुद्ध चक्र से है, जो कंठ के पीछे स्थित होता है और वाणी तथा अभिव्यक्ति से जुड़ा होता है। ज्योतिष के अनुसार, इनका संबंध बृहस्पति ग्रह से भी जोड़ा जाता है, जो संतान सुख और ज्ञान का कारक माना जाता है।


जब विशुद्ध चक्र कमजोर होता है, तो व्यक्ति को बोलने में कठिनाई हो सकती है, जैसे हकलाना या अपनी बात को सही तरीके से व्यक्त न कर पाना। इसके अलावा, गले, कान और नाक से जुड़ी समस्याएं भी बढ़ सकती हैं। व्यक्ति का आत्मविश्वास कम हो सकता है और उसकी क्षमताओं का पूर्ण विकास नहीं हो पाता।


चक्र को मजबूत करने की साधना

रात के समय एक शांत स्थान पर बैठकर मां स्कंदमाता का ध्यान करें। घी का दीपक जलाएं और देवी को लाल चंदन का तिलक लगाएं। इसके बाद वही तिलक अपने कंठ पर भी लगाएं। ध्यान करते समय अपने विशुद्ध चक्र पर प्रकाश या बिंदु की कल्पना करें। फिर मां के मंत्र का 108 बार जाप करें। नियमित रूप से ऐसा करने से धीरे-धीरे आत्मविश्वास और वाणी में सुधार होने लगता है।


मां स्कंदमाता को प्रसन्न करने के लिए यह मंत्र बेहद प्रभावी माना जाता है:


ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे


इस मंत्र का श्रद्धा और विश्वास के साथ जाप करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है और बाधाएं दूर होती हैं।