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चैत्र नवरात्रि में पीरियड्स के दौरान व्रत: जानें क्या करें और क्या न करें

चैत्र नवरात्रि के दौरान व्रत रखने का समय आ रहा है, लेकिन क्या पीरियड्स में व्रत रखना उचित है? इस लेख में जानें कि कैसे महिलाएं इस दौरान भक्ति कर सकती हैं। जानें पुरानी मान्यताओं, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और स्वास्थ्य संबंधी सावधानियों के बारे में। क्या करें और क्या न करें, इस पर भी जानकारी प्राप्त करें।
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चैत्र नवरात्रि में पीरियड्स के दौरान व्रत: जानें क्या करें और क्या न करें

चैत्र नवरात्रि का आगमन


नई दिल्ली: चैत्र नवरात्रि का समय आते ही भक्तों में मां दुर्गा की आराधना का उत्साह बढ़ जाता है। इस वर्ष, 19 मार्च 2026 से नौ पवित्र दिन आरंभ हो रहे हैं, जिनमें भक्त व्रत रखते हैं, पूजा करते हैं और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव करते हैं। लेकिन जब पीरियड्स चल रहे हों, तो क्या व्रत रखना उचित है? यह प्रश्न लाखों महिलाओं के मन में उठता है। पुरानी परंपराओं में कुछ सीमाएं थीं, लेकिन आज के दृष्टिकोण से भक्ति और स्वास्थ्य दोनों को एक साथ रखा जा सकता है। आइए, इस विषय पर सरलता से जानकारी प्राप्त करें।


क्या पीरियड्स में व्रत रखना संभव है?

जी हां, पीरियड्स के दौरान भी नवरात्रि का व्रत किया जा सकता है। सनातन धर्म में मासिक धर्म को एक स्वाभाविक प्रक्रिया माना जाता है। मां दुर्गा की शक्ति हर महिला में विद्यमान है, इसलिए इस समय भक्ति में कोई रुकावट नहीं होनी चाहिए। बस कुछ सावधानियां बरतें - अखंड ज्योति, मूर्ति या पूजा सामग्री को न छुएं। मन से जप, ध्यान और भजन करें। यदि स्वास्थ्य ठीक है, तो व्रत रखें, अन्यथा मां नहीं चाहेंगी कि आप किसी परेशानी का सामना करें।


पुरानी धार्मिक मान्यताएं

अतीत में, पीरियड्स को 'अशुद्धता' माना जाता था, जिसके कारण महिलाओं को मंदिर जाने या पूजा करने से रोका जाता था। कई परिवारों में आज भी यह परंपरा जारी है। लेकिन धार्मिक ग्रंथों में ऐसा कोई कठोर नियम नहीं है कि व्रत नहीं रखा जा सकता। समय के साथ लोग समझने लगे हैं कि यह प्रक्रिया भगवान द्वारा बनाई गई है। इसलिए, यदि मन शुद्ध है और श्रद्धा है, तो पूजा जारी रखी जा सकती है। कई विद्वान मानते हैं कि सच्ची भक्ति बाहरी नियमों से अधिक दिल से जुड़ी होती है।


वैज्ञानिक दृष्टिकोण

विज्ञान आज पीरियड्स को सामान्य मानता है। हार्मोनल बदलाव के कारण थकान या दर्द हो सकता है, लेकिन इसे अशुद्धता नहीं माना जाता। भक्ति व्यक्तिगत होती है - यदि आप आरामदायक महसूस कर रही हैं, तो व्रत रखें। मां दुर्गा करुणामयी हैं, वे आपकी सेहत को ध्यान में रखते हुए व्रत नहीं चाहेंगी। हल्के फलाहार जैसे फल, दूध, और नारियल पानी का सेवन करें। घर के सदस्य पूजा का कार्य संभाल सकते हैं। मां का ध्यान मन में रखें, यही सबसे बड़ी पूजा है।


स्वास्थ्य का ध्यान

पीरियड्स के दौरान व्रत रखते समय अपने शरीर की सुनना अत्यंत आवश्यक है। यदि कमजोरी, चक्कर या तेज दर्द हो, तो व्रत तोड़ दें। निर्जला व्रत न रखें। साबूदाना, कुट्टू, फल और दही जैसे हल्के खाद्य पदार्थों का सेवन करें। पानी और नारियल पानी अधिक पिएं। यदि डॉक्टर ने कोई सलाह दी हो, तो उसका पालन करें। याद रखें, मां दुर्गा स्वस्थ भक्त की पूजा को अधिक पसंद करती हैं। बिना दबाव के निर्णय लें।


क्या करें और क्या न करें

मन में मंत्र जपें और भजन सुनें। मूर्ति या कलश को न छुएं, घर के सदस्य पूजा का कार्य संभालें। हल्का फलाहार रखें, भारी उपवास से बचें। यदि व्रत नहीं रख पाएं, तो चिंता न करें - भक्ति जारी रखें। नवरात्रि का उद्देश्य आध्यात्मिक शांति है, न कि तकलीफ। अपनी आस्था और शरीर की स्थिति के अनुसार निर्णय लें। मां सबकी सुनती हैं।