Newzfatafatlogo

चैत्र पूर्णिमा का व्रत: तिथि, पूजा विधि और महत्व

चैत्र पूर्णिमा का व्रत हर साल चैत्र माह की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस लेख में जानें कि इस बार यह व्रत कब होगा, पूजा विधि क्या है और इसके महत्व के बारे में। जानिए कैसे इस व्रत से मानसिक शांति और धन-संपत्ति में वृद्धि होती है।
 | 
चैत्र पूर्णिमा का व्रत: तिथि, पूजा विधि और महत्व

चैत्र पूर्णिमा का व्रत

हर वर्ष चैत्र माह की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को चैत्र पूर्णिमा का व्रत मनाया जाता है। पूर्णिमा की तिथि हर महीने आती है और यह दिन भगवान विष्णु को समर्पित होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत को करने से मानसिक शांति और समृद्धि प्राप्त होती है। इस बार चैत्र पूर्णिमा को लेकर कुछ भ्रम है, क्योंकि 01 और 02 अप्रैल दोनों दिन पूर्णिमा तिथि रहेगी। इस लेख में हम आपको बताएंगे कि चैत्र पूर्णिमा का व्रत कब किया जाएगा।




तिथि और मुहूर्त


जानकारी के अनुसार, 01 अप्रैल को सुबह 07:07 बजे चैत्र पूर्णिमा तिथि की शुरुआत होगी। वहीं, 02 अप्रैल को सुबह 07:42 बजे पूर्णिमा तिथि समाप्त होगी। शास्त्रों के अनुसार, जिस दिन शाम को पूर्णिमा तिथि होती है, उसी दिन व्रत करना उचित माना जाता है। इस प्रकार, उदयातिथि के अनुसार, चैत्र पूर्णिमा का व्रत 01 अप्रैल 2026 को करना सही रहेगा। पूर्णिमा का स्नान और दान 02 अप्रैल की सुबह किया जाएगा।




पूजन विधि


इस दिन सुबह जल्दी स्नान करने के बाद सूर्य देव को अर्घ्य दें और फिर व्रत का संकल्प लें। एक लकड़ी की चौकी पर मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की मूर्ति स्थापित करें। उनके अभिषेक के बाद वस्त्र, फल-फूल आदि अर्पित करें। इसके बाद पूर्णिमा व्रत कथा का पाठ करें। पूजा के अंत में आरती करें और भगवान को भोग लगाएं। शाम को चंद्र देव को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करें।




महत्व


चैत्र पूर्णिमा का व्रत करने से धन संकट और दरिद्रता दूर होती है। इस दिन चंद्र देव को अर्घ्य देने से व्यक्ति का मनोबल मजबूत होता है। यदि किसी जातक की कुंडली में चंद्र दोष है, तो इस व्रत को करने से वह भी समाप्त हो जाता है।