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नवरात्रि: देवी दुर्गा की उपासना का पर्व और भोग का महत्व

नवरात्रि का पर्व देवी दुर्गा की उपासना का एक महत्वपूर्ण उत्सव है, जिसमें नौ दिनों तक विभिन्न रूपों की पूजा की जाती है। इस दौरान भक्तजन मां को विशेष भोग अर्पित करते हैं, जो उनकी कृपा प्राप्त करने का माध्यम होता है। जानें नवरात्रि की तिथियां, पूजा विधि और हर दिन के भोग का महत्व।
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नवरात्रि: देवी दुर्गा की उपासना का पर्व और भोग का महत्व

नवरात्रि का महत्व

नवरात्रि का पर्व देवी शक्ति मां दुर्गा की आराधना का एक महत्वपूर्ण उत्सव है। इस दौरान देवी शक्ति के नौ विभिन्न रूपों की पूजा की जाती है। साल में चार बार नवरात्रि मनाई जाती है: चैत्र, आषाढ़, माघ और शारदीय नवरात्र। इनमें से चैत्र और शारदीय नवरात्रि को विशेष महत्व दिया गया है, जबकि आषाढ़ और माघ को गुप्त नवरात्रि माना जाता है। पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान, जयपुर जोधपुर के निदेशक ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास के अनुसार, हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र मास की शुक्ल पक्ष प्रतिपदा तिथि 19 मार्च को सुबह 6:52 बजे से शुरू होगी और इसका समापन 20 मार्च को सुबह 4:52 बजे होगा। इस प्रकार, इस वर्ष चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 19 मार्च को घटस्थापना के साथ होगी और इसका समापन 27 मार्च को होगा।


नवरात्रि की पूजा विधि

ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि मां दुर्गा की आराधना के लिए नवरात्रि का समय सर्वोत्तम माना जाता है। भगवान राम ने भी नवरात्रि में मां भगवती की आराधना करके विजयादशमी के दिन रावण का संहार किया था। भक्तजन इन नौ दिनों में मां की पूजा-अर्चना करके उन्हें प्रसन्न करना चाहते हैं। क्या आप जानते हैं कि इन नौ दिनों में हर दिन मां को अलग-अलग भोग अर्पित करने का विधान है? नवरात्रि की नौ देवियां विभिन्न शक्तियों का प्रतीक मानी जाती हैं। यदि आप भी इन दिनों में मां को प्रसन्न करना चाहते हैं, तो हर दिन के अनुसार उन्हें पसंद का भोग अर्पित करें।


चैत्र नवरात्रि की तिथियां

चैत्र नवरात्रि की तिथियां


19 मार्च - नवरात्रि प्रतिपदा- मां शैलपुत्री पूजा और घटस्थापना


20 मार्च - नवरात्रि द्वितीया- मां ब्रह्मचारिणी पूजा


21 मार्च - नवरात्रि तृतीया- मां चंद्रघंटा पूजा


22 मार्च - नवरात्रि चतुर्थी- मां कुष्मांडा पूजा


23 मार्च - नवरात्रि पंचमी- मां स्कंदमाता पूजा


24 मार्च - नवरात्रि षष्ठी- मां कात्यायनी पूजा


25 मार्च - नवरात्रि सप्तमी- मां कालरात्रि पूजा


26 मार्च - नवरात्रि अष्टमी- मां महागौरी, रामनवमी


27 मार्च - नवरात्रि नवमी- मां सिद्धिदात्री, नवरात्रि पारण


नवरात्रि के दिन विशेष भोग

आइए, ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास से जानते हैं कि किस दिन किस देवी को कौन सा भोग अर्पित करना चाहिए।


पहला दिन- मां शैलपुत्री


नवरात्र के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा होती है। मां शैलपुत्री को आरोग्य की देवी माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति इस दिन गाय के शुद्ध देसी घी का भोग अर्पित करता है, तो मां शैलपुत्री की कृपा से उसे निरोग रहने का वरदान मिलता है।


दूसरा दिन- मां ब्रह्मचारिणी


जो लोग मां ब्रह्मचारिणी से दीर्घायु का वरदान चाहते हैं, उन्हें इस दिन शक्कर का भोग अर्पित करना चाहिए। ऐसा करने से व्यक्ति को अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता।


तीसरा दिन- मां चंद्रघंटा


तीसरे दिन मां चंद्रघंटा को दूध और दूध से बनी चीज़ों का भोग अर्पित किया जाता है। इससे जीवन के सभी दुख समाप्त हो जाते हैं।


चौथा दिन- मां कूष्मांडा


चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा की जाती है। इस दिन मालपुए का भोग अर्पित करने की परंपरा है। ब्राह्मणों को भी मालपुए खिलाने से बुद्धि का विकास होता है।


पांचवां दिन- मां स्कंदमाता


पांचवे दिन मां स्कंदमाता की पूजा होती है। इस दिन केले का भोग अर्पित करने से आजीवन आरोग्य का वरदान मिलता है।


छठां दिन- मां कात्यायनी


छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा होती है। इस दिन शहद का भोग अर्पित करने से आकर्षण का आशीर्वाद मिलता है।


सातवां दिन- मां कालरात्रि


सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा होती है। इस दिन गुड़ का भोग अर्पित करने से आकस्मिक संकट से रक्षा होती है।


आठवां दिन- मां महागौरी


आठवें दिन महागौरी की पूजा की जाती है। इस दिन नारियल का भोग अर्पित करने से संतान से जुड़ी समस्याएं दूर होती हैं।


नौवां दिन- मां सिद्धिदात्री


नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा होती है। इस दिन तिल का भोग अर्पित करने से आकस्मिक मृत्यु का भय दूर होता है।