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पदमिनी एकादशी व्रत: महत्व और पूजा विधि

पदमिनी एकादशी व्रत का महत्व और पूजा विधि जानें। यह व्रत भगवान श्रीहरि विष्णु की पूजा के लिए विशेष फलदायी है। जानें इसके नियम, पौराणिक कथा और शुभ मुहूर्त। इस व्रत के माध्यम से भक्तों को पुण्य फल की प्राप्ति होती है।
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पदमिनी एकादशी व्रत: महत्व और पूजा विधि

पदमिनी एकादशी व्रत का महत्व

आज पदमिनी एकादशी का व्रत है, जो ज्येष्ठ महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाया जाता है। इसे विशेष रूप से भगवान श्रीहरि विष्णु की पूजा के लिए रखा जाता है, जिससे भक्तों को पुण्य फल की प्राप्ति होती है। आइए, हम आपको इस व्रत के महत्व और पूजा विधि के बारे में जानकारी देते हैं। 


पदमिनी एकादशी व्रत के बारे में जानें

एकादशी का दिन हिंदू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन भगवान श्रीहरि विष्णु की पूजा की जाती है, जिससे भक्तों को पुण्य फल मिलता है। ज्येष्ठ महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पद्मिनी एकादशी कहा जाता है। अधिकमास की यह एकादशी 27 मई 2026 को मनाई जाएगी। यह हर तीन साल में एक बार आती है और भगवान विष्णु की पूजा के लिए विशेष फलदायी मानी जाती है। 


अधिकमास के बारे में विशेष जानकारी

हिंदू कैलेंडर और सूर्य कैलेंडर के बीच हर साल लगभग 11 दिनों का अंतर होता है। इसे संतुलित करने के लिए हर तीन साल में एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है, जिसे अधिकमास कहा जाता है। इस वर्ष, 27 मई 2026 को पद्मिनी एकादशी और 11 जून 2026 को परमा एकादशी का व्रत रखा जाएगा। यह समय आध्यात्मिक उन्नति और मोक्ष प्राप्ति के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को इन एकादशियों के महत्व के बारे में बताया था।


पदमिनी एकादशी व्रत का महत्व

पंडितों के अनुसार, पदमिनी एकादशी 'परम' सिद्धियों और ऐश्वर्य को देने वाली है। इस व्रत को करने से दरिद्रता और आर्थिक तंगी का नाश होता है। यह अज्ञात पापों से मुक्ति दिलाकर उत्तम गति प्रदान करती है। स्कंद पुराण में इस व्रत का महत्व बताया गया है। भगवान श्रीकृष्ण ने धर्मराज युधिष्ठिर को इस व्रत की विधि भी बताई थी।


पदमिनी एकादशी व्रत की पूजा विधि

पंडितों के अनुसार, अधिकमास की एकादशी (पद्मिनी और परमा) विशेष होती है। व्रत की पूर्व संध्या पर, यानी दशमी तिथि को, सात्विक भोजन करें। कांसे के बर्तन में भोजन करें और नमक का त्याग करें।


सुबह के समय पूजा के नियम

सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और स्वच्छ कपड़े पहनें। हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प करें और तांबे के लोटे से सूर्य देव को जल अर्पित करें।


पदमिनी एकादशी पर पूजा का तरीका

इस दिन चौकी सजाएं, एक साफ चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। भगवान को पीले चंदन का तिलक लगाएं, पीले फूल, तुलसी दल, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें।


पौराणिक कथा

शास्त्रों के अनुसार, त्रेता युग में राजा कीतृवीर्य की कई रानियां थीं, लेकिन उन्हें संतान नहीं हो रही थी। राजा और रानियां दुखी थे। एक दिन रानी ने माता अनुसूया से उपाय पूछा। माता ने रानियों को अधिकमास में एकादशी का व्रत करने के लिए कहा। रानी ने व्रत रखा और भगवान ने प्रसन्न होकर राजा को वरदान दिया।


पदमिनी एकादशी तिथि और शुभ मुहूर्त

एकादशी तिथि शुरू- 26 मई 2026, सुबह 5:10 बजे
एकादशी तिथि समाप्त- 27 मई 2026, सुबह 6:21 बजे
पारण का समय- 28 मई 2026, सुबह 5:25 से 7:56 बजे तक


पदमिनी एकादशी व्रत के 5 जरूरी नियम

पंडितों के अनुसार, पदमिनी एकादशी का व्रत अन्य एकादशियों की तुलना में कठिन होता है। व्रत के नियम दशमी तिथि से शुरू होते हैं। इस रात भगवान विष्णु की मूर्ति के सामने दीपक जलाकर जागरण करना चाहिए।