महानवमी: नवरात्रि का अंतिम दिन और कन्या पूजन की विशेषता
महानवमी का महत्व
नई दिल्ली: आज चैत्र नवरात्रि का समापन दिवस है, जिसे महानवमी या राम नवमी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन देवी दुर्गा के नौवें स्वरूप माता सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। नवरात्रि का यह नौ दिवसीय आध्यात्मिक अनुष्ठान आज समाप्त होता है। मुख्य पूजा के बाद कन्या पूजन का आयोजन किया जाता है, जिसके बाद व्रत का पारण किया जाता है, जिससे नवरात्रि का समापन होता है।
नवमी तिथि का समय
द्रिक पंचांग के अनुसार, चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि 26 मार्च को सुबह 11:48 बजे प्रारंभ हुई थी और यह 27 मार्च को सुबह 10:06 बजे समाप्त होगी। कन्या पूजन के लिए शुभ समय 27 मार्च को सुबह 6:17 बजे से 10:08 बजे तक रहेगा।
महानवमी का शुभ संयोग
महानवमी पर विशेष योग
इस वर्ष महानवमी को विशेष महत्व दिया जा रहा है क्योंकि इस दिन 'रवि योग' और 'सर्वार्थसिद्धि योग' का एक शुभ संयोग बन रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ये दोनों योग पूजा-अर्चना के लिए अत्यंत फलदायी माने जाते हैं। इन योगों के दौरान अनुष्ठान करने से विभिन्न प्रकार के कष्टों का निवारण होता है और शुभ फल की प्राप्ति होती है।
कन्या पूजन की विधि
कन्या पूजन कैसे करें?
देवी मां की पूजा के बाद 'कन्या पूजन' का आयोजन किया जाता है। इस अनुष्ठान में छोटी बालिकाओं को घर पर आमंत्रित किया जाता है और उनका सम्मान किया जाता है। उनके चरण धोकर, ललाट पर तिलक किया जाता है और उन्हें भोजन कराया जाता है।
इस दिन के लिए पारंपरिक रूप से 'हलवा', 'पूरी' और 'चना' का विशेष प्रसाद तैयार किया जाता है। लड़कियों के साथ एक छोटा लड़का भी होता है, जिसे भगवान भैरव का रूप माना जाता है। भोजन के बाद उन्हें उपहार और दक्षिणा दी जाती है और आशीर्वाद मांगा जाता है।
कन्या पूजन का महत्व
कितने वर्ष की लड़कियों की होती है पूजा?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, 2 से 10 वर्ष की आयु की लड़कियों को देवी का रूप माना जाता है। इन छोटी बच्चियों की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि आती है, बीमारियां दूर होती हैं और जीवन में सफलता का मार्ग प्रशस्त होता है।
