माणिक्य रत्न: सूर्य का आशीर्वाद और इसके अद्भुत लाभ
माणिक्य रत्न का महत्व
रत्नों की श्रेणी में माणिक्य को 'रत्नों का राजा' कहा जाता है। यह न केवल अपनी सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि ज्योतिष में इसे अत्यधिक शक्तिशाली रत्नों में से एक माना जाता है। माणिक्य का रंग लाल होता है और यह सूर्य ग्रह से सीधे जुड़ा हुआ है। इस लेख में, हम माणिक्य रत्न की विशेषताओं और इसके लाभों पर चर्चा करेंगे।
सूर्य का आशीर्वाद और माणिक्य रत्न
ज्योतिष के अनुसार, सूर्य पिता के साथ संबंध, आत्मविश्वास, मान-सम्मान और नेतृत्व क्षमता का प्रतीक है। जब किसी व्यक्ति की कुंडली में सूर्य कमजोर होता है, तो उसे शारीरिक कमजोरी, असफलता और मानसिक तनाव का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में माणिक्य पहनने से सूर्य की ऊर्जा को सक्रिय किया जा सकता है।
माणिक्य रत्न के लाभ
यदि आप सार्वजनिक बोलने या निर्णय लेने में संकोच करते हैं, तो माणिक्य पहनने से आपके अंदर नई ऊर्जा और साहस का संचार होता है।
फलदीपिका ग्रंथ के अनुसार, जो लोग राजनीति, प्रशासनिक सेवाओं या उच्च पदों की ओर बढ़ना चाहते हैं, उनके लिए माणिक्य पहनना भाग्य को खोलने वाला माना जाता है।
माणिक्य पहनने से आंखों की रोशनी में सुधार होता है और हृदय संबंधी समस्याओं में भी लाभ होता है। यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाता है।
इसके अलावा, माणिक्य रत्न पहनने से पिता के साथ चल रहे मतभेद दूर होते हैं और समाज में आपकी प्रतिष्ठा में वृद्धि होती है।
किसे नहीं पहनना चाहिए माणिक्य
हालांकि माणिक्य रत्न बहुत प्रभावशाली है, यह संवेदनशील भी है। यदि आपकी कुंडली में सूर्य की स्थिति प्रतिकूल है, तो इसे पहनने से आंखों में जलन, सिरदर्द या अहंकार जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
माणिक्य को नीलम, हीरा या गोमेद के साथ पहनने की सलाह नहीं दी जाती है, क्योंकि ये ग्रह एक-दूसरे के प्रति शत्रुतापूर्ण होते हैं।
माणिक्य रत्न पहनने की विधि
माणिक्य रत्न को हमेशा सोने या तांबे की अंगूठी में पहनना चाहिए। इसे रविवार को सूर्योदय के समय गंगाजल और कच्चे दूध से शुद्ध करना चाहिए। इसके बाद, इसे अनामिका उंगली में पहनें।
