मौनी अमावस्या: क्या करें और क्या न करें
मौनी अमावस्या का महत्व
हिंदू धर्म में अमावस्या की तिथि का विशेष महत्व है। यह दिन आध्यात्मिक शुद्धि और पितृ तर्पण के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। माघ महीने में आने वाली अमावस्या को मौनी अमावस्या कहा जाता है। 18 जनवरी 2026 को पड़ने वाली इस अमावस्या पर ग्रहों का संयोग इसे और भी प्रभावशाली बनाता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, इस दिन स्वर्ग और पृथ्वी के बीच के द्वार खुलते हैं, जिससे पूर्वज अपने वंशजों से तर्पण और सम्मान की अपेक्षा लेकर आते हैं। इस दिन कोई भी गलती न करना चाहिए, क्योंकि छोटी-सी चूक पूजा के फल को नष्ट कर सकती है और पितृ दोष का कारण बन सकती है, जिससे परिवार में अशांति उत्पन्न हो सकती है।
मौनी अमावस्या पर क्या न करें
तामसिक भोजन और नशा: अमावस्या के दिन तामसिक चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए। इस दिन शरीर और मन की पवित्रता बनाए रखना आवश्यक है। मांस, मछली, अंडा, प्याज और लहसुन जैसे तामसिक भोजन से दूर रहना चाहिए। शराब या अन्य नशे से भी बचना चाहिए, क्योंकि इससे पितृ नाराज हो सकते हैं और घर में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ सकती है।
देर तक सोना और कलह करना: अमावस्या के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठना चाहिए। घर में किसी भी प्रकार के विवाद या झगड़े से बचना चाहिए। अशांति वाले घर में पितृ नहीं रुकते और बिना आशीर्वाद दिए लौट जाते हैं।
ब्रह्मचर्य का पालन न करना: इस दिन संयम रखना आवश्यक है। पति-पत्नी को शारीरिक संबंध बनाने से बचना चाहिए। धार्मिक ग्रंथों में कहा गया है कि अमावस्या पर गर्भाधान से उत्पन्न संतान के जीवन में कष्ट हो सकते हैं।
श्मशान या सुनसान जगहों पर जाना: अमावस्या की रात नकारात्मक शक्तियां अधिक सक्रिय होती हैं। इस दिन सुनसान रास्तों, जंगलों या श्मशान भूमि के पास नहीं जाना चाहिए।
मौनी अमावस्या के दिन क्या करें
मौन व्रत या ध्यान करें: अमावस्या के दिन कुछ घंटों के लिए मौन रहने का प्रयास करें। यदि मौन रहना संभव न हो, तो कम बोलें और भगवान का नाम जपते रहें। मौन रहने से एकाग्रता बढ़ती है और मानसिक शक्ति का विकास होता है।
पितृ तर्पण और दान: स्नान के बाद पितरों के नाम से जल में काले तिल मिलाकर अर्घ्य दें। दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पितरों का ध्यान करें और किसी गरीब या ब्राह्मण को अनाज, गर्म कपड़े या तिल के लड्डू का दान करें।
दीपदान और पीपल पूजा: शाम के समय घर के मंदिर और मुख्य द्वार पर दीपक जलाएं। पीपल के पेड़ की पूजा करना और वहां दीपक प्रज्ज्वलित करना शुभ होता है।
गंगा स्नान: इस दिन गंगा तट पर स्नान करना बेहद शुभ माना जाता है। यदि संभव न हो, तो घर पर गंगाजल मिलाकर स्नान करें और भगवान विष्णु और शिव की आराधना करें।
