मौनी अमावस्या: धार्मिक महत्व और शुभ मुहूर्त
मौनी अमावस्या का महत्व
नई दिल्ली: आज मौनी अमावस्या का पावन पर्व मनाया जा रहा है, जिसे माघ अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। हिंदू धर्म में इस तिथि को अत्यंत शुभ और पुण्यदायी माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मौनी अमावस्या के दिन पवित्र नदियों में स्नान, दान पुण्य, भगवान विष्णु की आराधना और पितरों का तर्पण करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।
शास्त्रों में उल्लेख है कि इस दिन मौन धारण करने से मन शांत होता है और आत्मिक शक्ति का विकास होता है। मौन व्रत के कारण ही इस अमावस्या को मौनी अमावस्या कहा गया है। मान्यता के अनुसार, आज ब्रह्म मुहूर्त से लेकर सूर्योदय तक का समय स्नान और दान के लिए सबसे उत्तम माना जाता है।
सूर्यदेव को अर्घ्य देना
सूर्यदेव को अर्घ्य देना विशेष पुण्यदायी
जो श्रद्धालु गंगा या अन्य किसी पवित्र नदी तक नहीं पहुंच सकते, वे घर पर ही स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर धार्मिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं। स्नान के पश्चात सूर्यदेव को अर्घ्य देना और पितरों का स्मरण करना विशेष पुण्यदायी माना गया है। ऐसा करने से पारिवारिक सुख समृद्धि बढ़ती है और पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
शुभ मुहूर्त
क्या है शुभ मुहूर्त?
मौनी अमावस्या के अवसर पर विभिन्न धार्मिक कार्यों के लिए अलग-अलग शुभ मुहूर्त बताए गए हैं। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 05:32 बजे से 06:23 बजे तक रहेगा। प्रातः संध्या का समय सुबह 05:58 बजे से 07:15 बजे तक माना गया है। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:27 बजे से 01:11 बजे तक रहेगा। पितरों के तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान के लिए सुबह 11:30 बजे से दोपहर 02:30 बजे तक का समय श्रेष्ठ बताया गया है। इन शुभ समयों में किए गए धार्मिक कर्मों का फल कई गुना बढ़ जाता है।
स्नान के नियम
स्नान के दौरान इन नियमों का करें पालन
मौनी अमावस्या के दिन स्नान के दौरान नियमों का पालन करना आवश्यक माना गया है। नदी में स्नान करने वाले श्रद्धालुओं को तीन बार डुबकी लगाकर सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित करना चाहिए। घर पर स्नान करने वाले लोग तांबे के पात्र में जल, तिल और फूल डालकर सूर्यदेव को जल अर्पित करें। इसके बाद कुछ समय तक मौन धारण करना अत्यंत पुण्यदायी माना गया है।
पूजा विधि
क्या है पूजा विधि?
इस दिन भगवान विष्णु, माता गंगा और पितरों की पूजा का विशेष विधान बताया गया है। ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और पूजा स्थल पर दीपक जलाकर व्रत का संकल्प लें। दिन भर संयम रखें और भगवान का ध्यान करें। शाम को पुनः दीप धूप जलाकर पूजा करने से व्रत पूर्ण माना जाता है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, मौनी अमावस्या का व्रत जीवन रक्षा और सौभाग्य वृद्धि से जुड़ा माना गया है। कथा में सोमा धोबिन के पुण्य प्रताप से गुणवती के पति को जीवनदान मिलने का उल्लेख मिलता है।
