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रमजान का पांचवां रोजा: इबादत और दुआओं का खास दिन

रमजान का पांचवां रोजा मुसलमानों के लिए दुआओं और इबादत का खास दिन है। इस दिन की विशेषता यह है कि सच्चे दिल से की गई दुआएं अधिक स्वीकार होती हैं। रोजेदार को चाहिए कि वह अपनी नीयत को साफ रखे और नेक कार्यों में संलग्न रहे। यह दिन हमें याद दिलाता है कि तकवा और सच्चाई का पालन करना कितना महत्वपूर्ण है। जानें इस दिन के महत्व और इबादत की तैयारी के बारे में।
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रमजान का पांचवां रोजा: इबादत और दुआओं का खास दिन

रमजान का महत्व और पांचवां रोजा

नई दिल्ली: रमजान का पवित्र महीना मुसलमानों के लिए अल्लाह से जुड़ने, आत्म-सुधार और भलाई के कार्यों में संलग्न होने का एक अनमोल अवसर है। यह केवल भूख और प्यास का समय नहीं है, बल्कि यह दिल, जुबान और दृष्टि को भी शुद्ध रखने की शिक्षा देता है। 19 फरवरी 2026 से आरंभ हुए इस महीने में आज, 23 फरवरी को, पांचवां रोजा है। पहले अशरे की रहमत के इन प्रारंभिक दिनों में रोजेदार धीरे-धीरे नए दिनचर्या में ढलते हैं। पांचवे रोजे तक इबादत की लय स्थापित हो जाती है, जो पूरे महीने की बरकतों को मजबूत बनाती है.


पांचवां रोजा: रहमत के अशरे का महत्वपूर्ण पड़ाव

रमजान के पहले दस दिन रहमत के रूप में जाने जाते हैं। इस दौरान अल्लाह अपनी कृपा बरसाता है और भक्त नेक कार्यों में सक्रिय रहते हैं। पांचवां रोजा इसी समय में आता है, जहां यदि पहले दिनों में कोई कमी रह गई हो, तो उसे सुधारने का अवसर मिलता है। रोजा केवल पेट की भूख को नहीं रोकता, बल्कि गुस्से, झूठ और गलत दृष्टिकोण से भी बचाता है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि तकवा हमारे दिल में होना चाहिए, ताकि अल्लाह का डर और प्रेम दोनों बढ़ें.


दुआओं का विशेष दिन और इबादत की तैयारी

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पांचवें रोजे को दुआ का दिन माना जाता है। सच्चे मन से की गई दुआएं इस दिन अधिक स्वीकार होने की संभावना रखती हैं। रोजेदार को चाहिए कि वह सेहरी में अपनी नीयत को साफ रखे, फज्र की नमाज समय पर अदा करे और कुरआन की तिलावत करे। आयतों का अर्थ समझकर पढ़ना और उन्हें अपने जीवन में उतारने का प्रयास करना ईमान को मजबूत करता है। धैर्य का अभ्यास करें, किसी की बात पर गुस्सा न करें और अपनी जुबान को बुराई से बचाएं.


दान और मदद: रोजे की आत्मा

रमजान में नेक कार्यों का सवाब कई गुना बढ़ जाता है। पांचवें रोजे में जरूरतमंदों की सहायता करना, किसी को भोजन कराना या छोटी मदद देना बड़ा पुण्य कमाता है। यह कार्य दिल को नरम बनाता है और समाज में भाईचारे को बढ़ावा देता है। रोजा हमें सिखाता है कि दूसरों की कठिनाइयों को समझें और जहां संभव हो, मदद का हाथ बढ़ाएं। इस प्रकार, इबादत केवल व्यक्तिगत नहीं रहती, बल्कि सामाजिक स्तर पर भी प्रभाव डालती है.


रोजे का समय और महत्वपूर्ण बातें

23 फरवरी 2026 को रोजा सुबह फज्र (लगभग 5:16 बजे) से शुरू होकर शाम इफ्तार (6:30 बजे) तक रहेगा। सेहरी फज्र से पहले तक की जा सकती है और मगरिब की अजान के साथ रोजा खोला जाता है। स्थानीय मस्जिद या कैलेंडर के अनुसार समय की पुष्टि अवश्य करें, क्योंकि फिक्ह के मतभेद से थोड़ा फर्क पड़ सकता है। रोजा रखते समय सेहत का ध्यान रखें और इफ्तार में हल्का भोजन करें.


रमजान का हर पल कीमती

पांचवां रोजा हमें खुद से सवाल करने का अवसर देता है - क्या हम केवल भूखे हैं या वास्तव में बदलाव ला रहे हैं? तकवा, सच्चाई और साफ नीयत रोजे की असली पहचान हैं। इस दिन अधिक दुआ करें, नमाज में नियमितता बनाए रखें, कुरआन पढ़ें और अपने गुनाहों की माफी मांगें। यही वह बरकत है जो पूरे महीने को रोशन रखती है और जीवन को नेक मार्ग पर ले जाती है.