विष्णु सहस्त्रनाम का महत्व और पाठ विधि
इस लेख में विष्णु सहस्त्रनाम का महत्व और पाठ विधि के बारे में जानकारी दी गई है। महाभारत के अनुशासन पर्व में इसका उल्लेख किया गया है, जहां भीष्म पितामह ने इसके महत्व को बताया। जानें कैसे करें इसका पाठ और इसके लाभ क्या हैं।
| May 27, 2026, 13:41 IST
विष्णु सहस्त्रनाम का परिचय
महाभारत के 'अनुशासन पर्व' में विष्णु सहस्त्रनाम का उल्लेख सबसे पहले किया गया है। यह वह समय था जब कुरुक्षेत्र में पांडवों और कौरवों के बीच युद्ध समाप्त हो चुका था और भीष्म पितामह बाणों की शैय्या पर लेटे हुए अपने अंतिम क्षणों का इंतजार कर रहे थे। इस दौरान धर्मराज युधिष्ठिर ने पूछा कि इस संसार में सबसे बड़ा धर्म क्या है और किसके द्वारा व्यक्ति सभी दुखों से मुक्त हो सकता है। तब भीष्म पितामह ने धर्मराज को भगवान श्रीहरि विष्णु के 1000 नामों के महत्व के बारे में बताया।
विष्णु सहस्त्रनाम का महत्व
महाभारत के अनुशासन पर्व अध्याय 149 में विष्णु सहस्त्रनाम का उल्लेख मिलता है। इसका अर्थ है भगवान विष्णु के 1000 नाम। माना जाता है कि इन नामों में पूरी सृष्टि का सार छिपा है। जब कोई व्यक्ति इन नामों का जप करता है, तो उसके चारों ओर एक सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जो नकारात्मकता को दूर करती है।
विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ कैसे करें
विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ विधि
विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करने के लिए कोई कठिन नियम नहीं है। सुबह स्नान के बाद साफ कपड़े पहनकर शांति से बैठें। यदि आप संस्कृत में नहीं पढ़ सकते, तो आप इसे सुन सकते हैं या हिंदी अनुवाद पढ़ सकते हैं। सबसे महत्वपूर्ण नियम 'भाव' और 'श्रद्धा' है।
विष्णु सहस्त्रनाम के कुछ श्लोक
विष्णु सहस्त्रनाम
शुक्लाम्बरधरं विष्णुं शशिवर्णं चतुर्भुजम्।
प्रसन्नवदनं ध्यायेत् सर्वविघ्नोपशान्तये ॥१॥
यस्य द्विरदवक्त्राद्याः पारिषद्याः परः शतम्।
विघ्नं निघ्नन्ति सततं विष्वक्सेनं तमाश्रये ॥२॥
व्यासं वसिष्ठनप्तारं शक्तेः पौत्रमकल्मषम्।
पराशरात्मजं वन्दे शुकतातं तपोनिधिम् ॥३॥
ध्यान और न्यास विधि
ध्यान और न्यास विधि
ॐ अस्य श्रीविष्णोर्दिव्यसहस्रनामस्तोत्रमहामन्त्रस्य।
श्री वेदव्यासो भगवान ऋषिः।
अनुष्टुप् छन्दः।
श्रीमहाविष्णुः परमात्मा श्रीमन्नारायणो देवता।
