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वैशाख पूर्णिमा 2026: पूजा विधि, मुहूर्त और महत्व

01 अप्रैल 2026 को वैशाख पूर्णिमा का पर्व सिद्धि योग में मनाया जा रहा है। इस दिन स्नान, दान और व्रत का विशेष महत्व है। श्रद्धालु सत्यनारायण भगवान की पूजा करते हैं और चंद्र देव को अर्घ्य अर्पित करते हैं। जानें इस दिन के स्नान, दान और पूजा विधि के बारे में, साथ ही महत्वपूर्ण मुहूर्त और चंद्रोदय का समय।
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वैशाख पूर्णिमा 2026: पूजा विधि, मुहूर्त और महत्व

वैशाख पूर्णिमा का महत्व

आज, 01 अप्रैल 2026 को, सिद्धि योग में वैशाख पूर्णिमा का पर्व मनाया जा रहा है। इस दिन स्नान, दान और व्रत का विशेष महत्व है। श्रद्धालु इस दिन पूजा करते हैं और व्रत रखते हैं। स्नान के बाद दान करने से पापों का नाश होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है। सत्यनारायण भगवान की पूजा और कथा सुनने से भी पुण्य फल मिलता है। प्रदोष काल में मां लक्ष्मी और रात में चंद्र देव की पूजा करके अर्घ्य अर्पित किया जाता है। आइए, वैशाख पूर्णिमा के स्नान, दान, पूजा विधि, मुहूर्त और मंत्र के बारे में विस्तार से जानते हैं...


तिथि और मुहूर्त

वैशाख पूर्णिमा की तिथि की शुरुआत - 30 अप्रैल 2026 की रात 9:12 बजे से


वैशाख पूर्णिमा तिथि का समापन - 1 मई 2026 की रात 10:52 बजे पर


वैशाख पूर्णिमा स्नान का मुहूर्त - सुबह 04:15 से 04:58 बजे तक, सूर्योदय के बाद भी स्नान किया जा सकता है।


सत्यनारायण भगवान की पूजा का शुभ मुहूर्त - सुबह 07:20 से 10:39 बजे तक


वैशाख पूर्णिमा पर लक्ष्मी पूजन का समय - शाम 06:56 के बाद


चंद्रोदय का समय

आज, वैशाख पूर्णिमा का चंद्रोदय 06:52 बजे होगा। जब पूर्ण चंद्रमा निकले, तब अर्घ्य देकर पूजा करें। अर्घ्य देने के बाद वैशाख पूर्णिमा का व्रत और पूजा संपन्न मानी जाती है। व्रत का पारण 02 मई 2026 की सुबह 05:40 बजे के बाद होगा।


स्नान और दान की विधि

इस दिन सुबह जल्दी उठकर गंगा स्नान करें। यदि गंगा स्नान संभव न हो, तो नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें। इसके बाद साफ कपड़े पहनें और सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करें। फिर वैशाख पूर्णिमा के व्रत और पूजा का संकल्प लें। इस दिन आप चीनी, खीर, चावल, दूध, सफेद वस्त्र, मखाना, मिश्री, चांदी आदि का दान कर सकते हैं। जल का दान भी करें, इससे पुण्य लाभ होगा।