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शनि ग्रह के प्रभाव: साढ़ेसाती और ढैय्या के दौरान क्या करें और क्या न करें

शनि ग्रह का वैदिक ज्योतिष में महत्वपूर्ण स्थान है, खासकर जब यह मीन राशि में गोचर करता है। इस दौरान कुछ राशियों पर साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव पड़ता है। जानें कि किन जातकों को सावधान रहना चाहिए और क्या उपाय करने से शनिदेव का आशीर्वाद प्राप्त किया जा सकता है। इस लेख में हम आपको बताएंगे कि साढ़ेसाती और ढैय्या के दौरान क्या करना चाहिए और क्या नहीं।
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शनि ग्रह के प्रभाव: साढ़ेसाती और ढैय्या के दौरान क्या करें और क्या न करें

शनि ग्रह का महत्व

वैदिक ज्योतिष में शनि ग्रह का एक विशेष स्थान है। यह ग्रह अपनी धीमी गति के लिए जाना जाता है और इसे न्याय का प्रतीक माना जाता है। जिन जातकों की कुंडली में शनि कमजोर होता है, उन्हें कई समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है, जबकि मजबूत शनि वाले जातकों को सुख-सुविधाएं प्राप्त होती हैं।


शनि का गोचर और राशियों पर प्रभाव

29 मार्च 2025 से शनि मीन राशि में गोचर कर चुके हैं, जिससे कुछ राशियों पर शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव पड़ रहा है। मेष राशि पर साढ़ेसाती का पहला चरण शुरू हो चुका है, जबकि कुंभ राशि पर इसका अंतिम चरण और मीन राशि पर दूसरा चरण चल रहा है। सिंह और धनु राशि के जातकों पर शनि की ढैय्या का प्रभाव भी शुरू हो गया है।


साढ़ेसाती और ढैय्या के दौरान सावधानियाँ

जिन जातकों पर शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या चल रही है, उन्हें सादा जीवन जीने की सलाह दी जाती है। मांस और मदिरा का सेवन करने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे शनिदेव का प्रकोप हो सकता है।


असहाय जीवों को बिना वजह परेशान नहीं करना चाहिए। झूठ बोलने वाले और झगड़े कराने वाले व्यक्तियों से शनिदेव नाराज हो जाते हैं।


मंगलवार और शनिवार को काले कपड़े या चमड़े का सामान खरीदने से बचें। इसके बजाय, गुड़, तेल, लोहा और काले तिल का दान करना बेहतर होता है।


गरीबों और मजदूरों को अपशब्द कहने से बचें, क्योंकि ऐसा करने पर शनिदेव दंडित कर सकते हैं।


साढ़ेसाती या ढैय्या के दौरान अपनी सेहत का ध्यान रखना आवश्यक है। संयम और सेवा भाव रखने से शनिदेव का आशीर्वाद प्राप्त होगा।