शनि जयंती 2023: शनि देव के मंत्र और जप विधि
शनि जयंती का महत्व
आज, 16 मई को शनि जयंती का पर्व मनाया जा रहा है। यह पर्व ज्येष्ठ मास की कृष्ण पक्ष की अमावस्या को मनाया जाता है, जो शनि देव के जन्म का दिन है। इस बार यह विशेष अवसर शनिवार की अमावस्या पर आ रहा है, जो पिछले 13 वर्षों में पहली बार हो रहा है। यदि आप शनि देव को प्रसन्न करना चाहते हैं, तो यह दिन आपके लिए अत्यंत शुभ है। इस दिन आप शनि के मंत्रों का जप कर सकते हैं, जिससे आपको शनि की शुभ दृष्टि प्राप्त होगी। वर्तमान में, सिंह और धनु राशि के जातकों पर शनि की ढैय्या चल रही है, जबकि कुंभ, मीन और मेष राशि के जातकों पर शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव है। इस खास अवसर पर, आइए जानते हैं कि शनि देव के कौन से मंत्रों का जप करना सबसे लाभकारी है और उनकी विधि क्या है।
शनि देव के मंत्र और उनके अर्थ
ओम शं शनैश्चराय नमः
इस मंत्र का अर्थ है, "हे शनिदेव, आपको नमस्कार। हम आपसे प्रार्थना करते हैं कि आप हमारे द्वारा अनजाने में किए गए पापों को नष्ट करें और हमें शुभ फल प्रदान करें।"
ओम शन्नो देविर्भिष्ठयः आपो भवन्तु पीतये।
यह शनि देव का गायत्री मंत्र है। इस मंत्र का जप करने से व्यक्ति पर शनिदेव की विशेष कृपा बनी रहती है।
ओम नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्। छाया मार्तण्ड सम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्।।
यह मंत्र शनिदेव की प्रार्थना और तांत्रिक मंत्र है। इसका अर्थ है, "नीले रंग के समान आभा वाले, सूर्य के पुत्र, यम के भाई, छाया और सूर्य के पुत्र शनिदेव, हम आपको नमस्कार करते हैं। कृपा करें।"
ओम प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः
यह शनिदेव का बीज मंत्र है। जिन पर शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या चल रही है, उन्हें इस मंत्र का जप करना चाहिए।
शनि मंत्र जप करने की विधि
- शनि जयंती के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें।
- अब साफ काले या नीले रंग के वस्त्र पहनें।
- पीपल के पेड़ पर जल अर्पित करें और वहां सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
- शनि देव को काले तिल, उड़द दाल, नीले फूल और सरसों का तेल अर्पित करें।
- यदि आपके घर के पास शनि मंदिर है, तो पश्चिम दिशा की ओर मुख करके आसन पर बैठें। आप अपने घर के मंदिर में भी बैठ सकते हैं।
- इसके बाद रुद्राक्ष की माला लेकर शनि के मंत्रों का जप करें।
