शनि जयंती: महत्व, तिथि और पूजा विधि
शनि जयंती का महत्व
हिंदू धर्म में शनि जयंती का एक विशेष स्थान है। हिंदू पंचांग के अनुसार, यह पर्व हर साल ज्येष्ठ मास की कृष्ण पक्ष की अमावस्या को मनाया जाता है। इस वर्ष, शनि जयंती 16 मई को होगी। मान्यता है कि शनि देव न्याय के देवता हैं, और इस दिन विधिपूर्वक पूजा करने से भक्तों के कष्ट दूर होते हैं। ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास के अनुसार, शनि देव सभी भक्तों को उनके कर्मों के अनुसार फल देते हैं। भक्त शनि देव को प्रसन्न करने के लिए विभिन्न प्रकार की आराधना करते हैं।
शनि जयंती तिथि
ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि इस वर्ष ज्येष्ठ माह की अमावस्या 16 मई को है। यह तिथि सुबह 05:11 बजे से शुरू होकर 17 मई को 01:30 बजे समाप्त होगी।
शुभ योग
इस वर्ष शनि जयंती के साथ शनिश्चरी अमावस्या का योग भी बन रहा है, जिससे यह दिन विशेष फलदायी हो गया है। 16 मई को सौभाग्य योग और शोभन योग भी बन रहे हैं, जो पूजा-पाठ के लिए लाभकारी माने जाते हैं।
भगवान शनि को प्रसन्न करने के उपाय
ज्योतिषीय दृष्टि से, पीपल का पेड़ शनि से जुड़ा हुआ है। हर शनिवार को पीपल की जड़ में जल चढ़ाने से कष्टों का निवारण होता है। शनि जयंती से शुरू होकर हर शनिवार को 'ऊं प्रां प्रीं प्रौं स: शनैश्चराय नम:' का जाप करना चाहिए।
क्या न करें
शनि जयंती के दिन लोहे की वस्तुएं घर में नहीं लानी चाहिए। इसके अलावा, शमी या पीपल के वृक्ष को हानि नहीं पहुंचानी चाहिए। इस दिन बड़े बुजुर्गों का अपमान भी नहीं करना चाहिए।
शनि देव की पूजा विधि
इस दिन सुबह उठकर स्नान करने के बाद व्रत और पूजा का संकल्प लें। शनि देव की मूर्ति स्थापित करें और उन्हें तेल, फूल, और काला उड़द चढ़ाएं। पूजा के बाद गरीबों को भोजन कराना और दान करना भी शुभ माना जाता है।
