सकट चौथ: गणेश पूजा का महत्व और भोग चढ़ाने की विधि
सकट चौथ का महत्व
नई दिल्ली: सकट चौथ एक महत्वपूर्ण और पवित्र हिंदू त्योहार है, जिसे संकष्टी चतुर्थी या तिलकुट चौथ के नाम से भी जाना जाता है। यह व्रत माघ महीने के कृष्ण पक्ष के चौथे दिन मनाया जाता है। भक्तों का मानना है कि इस दिन भगवान गणेश की पूजा करने से जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।
सकट चौथ पर चढ़ाने वाले भोग
इस दिन भगवान गणेश को विशेष भोग अर्पित किया जाता है, क्योंकि वे सात्विक और शुद्ध भोजन से प्रसन्न होते हैं। गणपति को भोग चढ़ाने से व्रत का फल बढ़ता है और परिवार को आशीर्वाद मिलता है।
सकट चौथ पर चढ़ाएं ये भोग
- तिल के लड्डू
- मोदक (गणपति की पसंदीदा मिठाई)
- तिलकुट
- गुड़-धानी (गुड़ और भुने हुए अनाज)
- केला
- बूंदी के लड्डू
- गन्ना
- बेर
- शकरकंद
माघ महीने में ये सभी चीजें शुद्ध और शुभ मानी जाती हैं।
भोग चढ़ाने के नियम
भोग चढ़ाने का नियम
भगवान गणेश को भोग अर्पित करते समय कुछ महत्वपूर्ण नियमों का पालन करना आवश्यक है। इन नियमों का पालन करने से भक्त अधिक आध्यात्मिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं। भोग तैयार करने से पहले स्नान करना और साफ कपड़े पहनना चाहिए। पूजा स्थल को भी साफ और शांत रखना चाहिए।
सात्विक भोजन का महत्व
सात्विक भोजन
सकट चौथ पर केवल सात्विक भोजन का ही उपयोग किया जाना चाहिए। प्याज, लहसुन और किसी भी तामसिक भोजन से बचना चाहिए। परंपरा के अनुसार, व्रत चंद्रमा के दर्शन के बाद ही तोड़ा जाता है। सबसे पहले चंद्रमा को जल अर्पित करें और फिर भगवान गणेश को भोग लगाएं।
प्रसाद का वितरण
भोग को प्रसाद के रूप में बांटे
पूजा करते समय देवी पार्वती और चंद्र देव को भी याद करना चाहिए। भोग चढ़ाने के बाद इसे परिवार के सदस्यों में प्रसाद के रूप में बांट देना चाहिए। व्रत रखने वाली महिलाओं को चंद्रमा देखने के बाद ही प्रसाद का सेवन करना चाहिए। इन रीति-रिवाजों का पालन करने से सकट चौथ एक सुखद और बाधा-मुक्त जीवन के लिए भगवान गणेश का आशीर्वाद प्राप्त करने का एक महत्वपूर्ण अवसर बन जाता है।
