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सरस्वती पूजा के नियम और मंत्र: ज्ञान की देवी की आराधना

इस लेख में देवी सरस्वती की पूजा के महत्व, संकल्प मंत्र, पूजा विधि और विशेष मंत्रों के बारे में जानकारी दी गई है। जानें कैसे मां सरस्वती की आराधना से आप ज्ञान और विद्या का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं। पूजा के नियमों का पालन करके आप मां सरस्वती को प्रसन्न कर सकते हैं।
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सरस्वती पूजा के नियम और मंत्र: ज्ञान की देवी की आराधना

सरस्वती पूजा का महत्व

ज्ञान और विद्या की देवी मानी जाने वाली देवी सरस्वती की पूजा करने से भक्तों को बुद्धि और ज्ञान का आशीर्वाद प्राप्त होता है। मां सरस्वती की भक्ति और श्रद्धा से की गई पूजा से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। यदि आप विशेष मंत्रों का जाप करते हैं, तो देवी सरस्वती आपसे प्रसन्न होती हैं। इस लेख में हम आपको सरस्वती पूजा के नियम और मंत्रों के बारे में जानकारी देंगे।


संकल्प मंत्र

सरस्वती पूजा आरंभ करने से पहले, हाथ में फूल, तिल, अक्षत, मिठाई और फल लेकर यह मंत्र बोलें: 'यथोपलब्धपूजनसामग्रीभिः माघ मासे बसंत पंचमी तिथौ भगवत्या: सरस्वत्या: पूजनमहं करिष्ये।' इसके बाद, सामग्री को मां सरस्वती के समक्ष अर्पित करें।


पूजन विधि

मां सरस्वती की पूजा स्थल को गंगाजल से पवित्र करें। फिर, मां सरस्वती की मूर्ति के सामने धूप, दीप और गुगुल जलाएं। इसके बाद विधिपूर्वक मां सरस्वती की पूजा आरंभ करें और मन में उनका ध्यान करते हुए पूजन सामग्री अर्पित करें।


सरस्वती वंदना

या कुन्देन्दु तुषारहार धवला या शुभ्रवस्त्रावृता।


या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना।।


या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता।


सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा।।


शुक्लां ब्रह्मविचारसारपरमांद्यां जगद्व्यापनीं।


वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यांधकारपहाम्।।


हस्ते स्फाटिक मालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थिताम्।


वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम्।।


सरस्वती मंत्र

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं सरस्वत्यै नमः।


ॐ सरस्वत्यै नमः।


ॐ ह्रीं ऐं ह्रीं सरस्वत्यै नम:।


ॐ भूर्भुवः स्वः सरस्वती देव्ये इहागच्छ इह तिष्ठ।


ॐ ऐं ह्रीं श्रीं वाग्देव्यै सरस्वत्यै नमः।


ॐ अर्हं मुख कमल वासिनी पापात्म क्षयम्कारी वद वद वाग्वादिनी सरस्वती ऐं ह्रीं नमः स्वाहा।


शारदायै नमस्तुभ्यं, मम ह्रदय प्रवेशिनी, परीक्षायां समुत्तीर्णं, सर्व विषय नाम यथा।।