Newzfatafatlogo

सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण: 75 साल का अमृत पर्व

आज का दिन सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का 75वां वर्ष है, जिसे विशेष रूप से सोमनाथ अमृत पर्व के रूप में मनाया जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर पर मंदिर के शिखर का जल अभिषेक किया। जानें इस प्राचीन मंदिर की विशेषता और चंद्रमा की पौराणिक कथा, जो इस मंदिर से जुड़ी है।
 | 
सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण: 75 साल का अमृत पर्व

सोमनाथ मंदिर का विशेष दिन


आज का दिन ऐतिहासिक है, क्योंकि आज से 75 वर्ष पूर्व भारत के प्राचीनतम मंदिरों में से एक सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण हुआ था। तब से, इस दिन को सोमनाथ अमृत पर्व के रूप में मनाया जाता है। इस विशेष अवसर पर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंदिर के 90 मीटर ऊंचे शिखर का जल अभिषेक किया।


सोमनाथ मंदिर और चंद्रमा की कथा

भारत में कुल 12 ज्योतिर्लिंग हैं, जिनमें से सोमनाथ को पहला स्थान प्राप्त है। यह मंदिर गुजरात में स्थित है और इसे चंद्रमा के स्वामी सोम द्वारा स्थापित किया गया माना जाता है।


इसका उल्लेख शिवपुराण और स्कंद पुराण जैसे कई धार्मिक ग्रंथों में मिलता है। कहा जाता है कि यहां दर्शन करने से भक्तों के सभी पाप समाप्त हो जाते हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, चंद्रदेव ने दक्ष प्रजापति की 27 बेटियों से विवाह किया, जिनमें से रोहिणी के प्रति उनका विशेष प्रेम था, जिससे अन्य पत्नियां दुखी रहने लगीं।


सोमनाथ मंदिर का निर्माण कैसे हुआ?

दुखी बेटियों ने अपने पिता से चंद्रदेव की शिकायत की। दक्ष प्रजापति ने चंद्रमा को समझाने का प्रयास किया, लेकिन चंद्रमा ने उनकी बात नहीं मानी। इसके परिणामस्वरूप, दक्ष ने चंद्रमा को श्राप दिया कि उनका तेज समाप्त हो जाएगा। धीरे-धीरे यह सच होने लगा और चंद्रमा की चमक कम होने लगी।


ब्रह्मदेव ने चंद्रमा को भगवान शिव की पूजा करने की सलाह दी। इसके बाद, चंद्रदेव ने गुजरात में शिवलिंग की स्थापना की और तपस्या करने लगे। उनकी घोर तपस्या से भगवान शिव प्रसन्न हुए और उन्होंने आशीर्वाद दिया कि श्रापमुक्त होना संभव नहीं है, लेकिन हर 15 दिन बाद उनका तेज बढ़ जाएगा। भगवान शिव वहीं बस गए और भक्तों के कष्टों को दूर करने लगे।