हनुमान जन्मोत्सव: सुंदरकांड का पाठ कैसे करें
हनुमान जन्मोत्सव पर सुंदरकांड का पाठ करने का महत्व और विधि जानें। इस लेख में हम बताएंगे कि कैसे इस विशेष दिन पर हनुमान जी की पूजा करें और सुंदरकांड का पाठ करें, जिससे आपकी सभी इच्छाएं पूरी हो सकें। जानें इस पवित्र अनुष्ठान के लाभ और सही तरीके से पाठ करने की विधि।
| Apr 2, 2026, 19:10 IST
हनुमान जन्मोत्सव का महत्व
आज, 02 अप्रैल को, हनुमान जन्मोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। हिंदू धर्म में हनुमान जी की पूजा का विशेष महत्व है। उन्हें 8 चिरंजीवियों में से एक माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, चैत्र माह की पूर्णिमा को हनुमान जी का जन्म हुआ था, इसलिए हर साल इस दिन को हनुमान जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस दिन विधिपूर्वक हनुमान जी की पूजा करने और सुंदरकांड का पाठ करने से भक्त की सभी इच्छाएं पूरी होती हैं। हनुमान जी की कृपा से व्यक्ति को ऐश्वर्य, धन, बल और बुद्धि की प्राप्ति होती है। इस लेख में हम आपको बताएंगे कि हनुमान जन्मोत्सव पर सुंदरकांड का पाठ कैसे करना चाहिए।
सुंदरकांड क्या है?
सुंदरकांड, रामचरितमानस का पांचवां अध्याय है, जिसे गोस्वामी तुलसीदास ने 16वीं शताब्दी में लिखा था। यह खंड पूरी तरह से हनुमान जी को समर्पित है। इसमें बजरंगबली द्वारा मां सीता की खोज, सुरसा राक्षसी का पराजय, लंका में प्रवेश, अशोक वाटिका का विनाश और लंका का दहन जैसे महत्वपूर्ण प्रसंग शामिल हैं। सुंदरकांड की हर घटना आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण और शक्तिशाली मानी जाती है, इसलिए इसे एक प्रमुख योग शास्त्र भी माना जाता है।
सुंदरकांड का पाठ क्यों करें?
हनुमान जयंती पर सुंदरकांड का पाठ करने से भक्त को बजरंगबली की कृपा प्राप्त होती है। इस दिन सुंदरकांड का पाठ विशेष फलदायी होता है, क्योंकि यह हनुमान जी की दिव्य शक्ति का आह्वान करता है। हनुमान जन्मोत्सव पर पढ़े गए सुंदरकांड का फल कई गुना अधिक होता है। यह न केवल पापों का नाश करता है, बल्कि शरीर और मन के उच्च चक्रों, विशेषकर कंठ और हृदय को जाग्रत करने में मदद करता है। सुंदरकांड का पाठ मानसिक और आध्यात्मिक उत्थान में सहायक होता है।
सुंदरकांड का पाठ कैसे करें?
सुंदरकांड का पाठ सुबह या शाम को 4 बजे के बाद करना चाहिए। माना जाता है कि दोपहर 12 बजे के बाद इसका पाठ शुभ नहीं होता। पाठ शुरू करने से पहले एक चौकी पर हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित करें और घी का दीपक जलाएं। फिर भगवान श्रीराम और हनुमान जी का स्मरण करते हुए पाठ आरंभ करें। पाठ के दौरान किसी भी विषय पर बात न करें और नकारात्मक विचारों से दूर रहें। श्रद्धा और भक्ति से पाठ करने के बाद हनुमान जी को फल-फूल, बूंदी या बेसन के लड्डू का भोग लगाएं। पाठ समाप्त होने के बाद हनुमान जी की आरती करना न भूलें और प्रसाद का वितरण करें।
