हनुमान जयंती: भक्तों की श्रद्धा और हनुमान चालीसा की प्रेरक कथा
हनुमान जयंती का उत्सव
आज, 2 अप्रैल को, पूरे देश में हनुमान जयंती का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है। रामभक्त हनुमान के जन्मदिन पर उनके अनुयायियों में उल्लास का वातावरण है। हर घर में रामचरितमानस और हनुमान चालीसा का पाठ किया जा रहा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हनुमान चालीसा की रचना किस कठिन परिस्थिति में हुई थी?
हनुमान चालीसा की रचना की कहानी
किस्सों और मान्यताओं के अनुसार, एक बार मुगल सम्राट अकबर ने तुलसीदास जी को अपने दरबार में बुलाया। अकबर चाहते थे कि तुलसीदास अपने काव्य का जादू दिखाएं, लेकिन तुलसीदास ने विनम्रता से मना कर दिया। इस पर अकबर क्रोधित होकर उन्हें जेल में डालने का आदेश दे देते हैं।
जब तुलसीदास जी को जेल में रखा गया, तो उन्हें बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं मिला। तब उन्होंने संकटमोचन हनुमान की शरण ली और संकल्प लिया कि वे पूरी भक्ति से हनुमान चालीसा की रचना करेंगे। उन्होंने लगातार 40 दिनों तक भक्ति में लीन रहकर चालीसा की चौपाइयां लिखीं। कहा जाता है कि चालीसा पूरी होने के 40वें दिन अकबर के महल पर अचानक बंदरों का एक बड़ा झुंड टूट पड़ा, जिससे महल को काफी नुकसान हुआ। इस घटना ने अकबर को चौंका दिया और उन्हें तुलसीदास की दिव्यता का एहसास हुआ। इसके बाद उन्होंने उन्हें जेल से मुक्त करने का आदेश दिया।
हनुमान जयंती का महत्व
हनुमान जयंती के अवसर पर लाखों भक्त हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करते हैं। मान्यता है कि संकट के समय चालीसा का पाठ करने से बजरंगबली अपने भक्तों पर कृपा करते हैं और उनकी रक्षा करते हैं। रामचरितमानस के साथ हनुमान चालीसा को राम भक्ति की सबसे प्रिय रचनाओं में से एक माना जाता है। इस दिन मंदिरों में विशेष पूजा, सुंदरकांड पाठ और भजन-कीर्तन का आयोजन किया जाता है। गोस्वामी तुलसीदास ने वराह क्षेत्र में राम कथा सुनने के बाद सांसारिक मोह-माया को त्यागकर संत जीवन अपनाया। उनकी सबसे प्रसिद्ध रचना रामचरितमानस है, जिसे हिंदी साहित्य का महाकाव्य माना जाता है। हनुमान चालीसा के अलावा, उन्होंने कई अन्य ग्रंथ भी लिखे हैं, जिनमें भक्तों की आस्था आज भी अटूट है।
