होलिका दहन 2026: शुभ मुहूर्त और राख के महत्व
होलिका दहन का त्योहार नजदीक
नई दिल्ली: रंगों का पर्व होली जल्द ही आने वाला है, और इसके साथ ही होलिका दहन की तैयारियां भी तेज हो गई हैं। यह प्रथा केवल आग जलाने का एक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। होलिका की राख को विशेष महत्व दिया जाता है, जिसे माथे पर लगाने और घर में सुरक्षित रखने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। आइए जानते हैं कि 2026 में होलिका दहन कब होगा और इस राख से जुड़े उपाय क्या हैं, जो जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं।
होलिका दहन का शुभ मुहूर्त और महत्व
2026 में फाल्गुन पूर्णिमा के अनुसार, होलिका दहन का मुहूर्त 3 मार्च को शाम 6:22 बजे से 8:50 बजे तक है। यह समय प्रदोष काल में आता है, जिसे अत्यंत शुभ माना जाता है। इस अग्नि में नकारात्मक शक्तियां जलकर राख बन जाती हैं, जो पवित्र और चमत्कारी होती है। लोग इसे इकट्ठा करके अपने घर लाते हैं और अगले दिन इसका उपयोग करते हैं। यह परंपरा परिवार में एकता और आस्था को बढ़ावा देती है।
राख माथे पर लगाने के पीछे की मान्यताएं
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, होलिका की राख बुरी नजर और नकारात्मक ऊर्जा से सुरक्षा प्रदान करती है। इसे लगाने से मानसिक शांति मिलती है और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। कई लोग मानते हैं कि यह रोगों से भी रक्षा करती है और घर में सुख-शांति लाती है। अनामिका उंगली से तिलक करते समय इष्ट देव का स्मरण करने से इसका प्रभाव और भी बढ़ जाता है। यह एक साधारण लेकिन गहरा आध्यात्मिक उपाय है।
घर में राख रखने की सही जगह और तरीका
राख को एक साफ डिब्बे में या लाल कपड़े में बांधकर पूजा घर में रखना चाहिए। कुछ लोग इसे तिजोरी या धन स्थान पर रखते हैं, जिससे आर्थिक स्थिति मजबूत बनी रहती है। मुख्य दरवाजे पर थोड़ी राख छिड़कने से घर में नकारात्मकता नहीं घुस पाती। इसे गंदे स्थान पर नहीं रखना चाहिए, अन्यथा मान्यता के अनुसार लाभ नहीं मिलता। यह छोटा सा उपाय पूरे साल सुरक्षा का कवच बन जाता है।
राख लगाने की विधि और सावधानियां
होलिका दहन के बाद जब अग्नि ठंडी हो जाए, तब थोड़ी राख लें। अगले दिन स्नान के बाद दाहिने हाथ की अनामिका उंगली से माथे पर तिलक करें। लगाते समय भगवान विष्णु या अपने कुलदेवता का ध्यान रखें। अधिक मात्रा में न लगाएं और इसे सूखी जगह पर रखें। यह विधि सरल है, लेकिन श्रद्धा से करने पर ही इसका पूरा फल मिलता है।
पौराणिक कथा और इसका संदेश
होलिका दहन की कहानी प्रह्लाद से जुड़ी हुई है। हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका की गोद में प्रह्लाद को अग्नि में बिठाया था, लेकिन भगवान की कृपा से प्रह्लाद बच गए और होलिका जल गई। यह घटना अहंकार पर आस्था की जीत को दर्शाती है। इसलिए इस राख को शुभ मानकर लोग आज भी इसका उपयोग करते हैं, जो जीवन में सकारात्मकता और विश्वास का संदेश देती है।
