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होलिका दहन: पूजा सामग्री और महत्व

होलिका दहन, जो होली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, अच्छाई की विजय का प्रतीक है। इस वर्ष यह 3 मार्च को मनाया जाएगा। जानें पूजा के लिए आवश्यक सामग्री और उनके महत्व के बारे में। गाय के गोबर से बनी माला का विशेष महत्व है, जो परिवार के सदस्यों की सुरक्षा का प्रतीक है। इस लेख में पूजा के दौरान की जाने वाली क्रियाओं और सावधानियों के बारे में भी जानकारी दी गई है।
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होलिका दहन: पूजा सामग्री और महत्व

होलिका दहन का महत्व


नई दिल्ली: होली केवल रंगों का पर्व नहीं है, बल्कि यह एक प्राचीन परंपरा है जो अच्छाई की विजय का संदेश देती है। होलिका दहन इस पर्व की शुरुआत है, जिसमें शाम को अग्नि में बुराई का नाश होता है और सुबह होलिका की पूजा से दिन की शुरुआत होती है। परिवार के साथ मिलकर पूजा करने से घर में खुशियों का संचार होता है। इस वर्ष होलिका दहन 3 मार्च को प्रदोष काल में मनाया जाएगा। पूजा की सामग्री को पहले से तैयार रखना आवश्यक है, ताकि कोई कमी न रह जाए। आइए जानते हैं कि पूजा के लिए थाली में क्या-क्या होना चाहिए और उनका महत्व क्या है।


पूजा सामग्री की सूची

होलिका पूजा के लिए थाली में निम्नलिखित सामग्रियां अवश्य रखें: नारियल, गुलाल, रोली, धूप, फूल, गाय के गोबर से बनी माला, अनाज (विशेषकर नया गेहूं), साबुत मूंग दाल, कलावा, कलश में थोड़ा जल, सुपारी, घी, मिट्टी का दीपक, सरसों के दाने, लाल कपड़े का टुकड़ा, गन्ना और मिठाई जैसे मलपुआ या गुजिया। इन सभी सामग्रियों के साथ पूजा संपन्न होती है। परिवार के साथ मिलकर होलिका के पास जाकर पूजा करें, जिससे उत्साह और बढ़ता है।


गोबर उपलों की माला का महत्व

गाय के गोबर से बनी माला होलिका दहन में अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। मान्यता है कि हर उपला परिवार के सदस्य के नाम से अग्नि में डाला जाता है, जिससे हर सदस्य पर सुरक्षा कवच बनता है। यह प्रहलाद की रक्षा और होलिका के अहंकार का नाश करने का प्रतीक है। माला चढ़ाते समय अच्छे विचारों का ध्यान रखें। पूजा के बाद घर के बुजुर्गों से आशीर्वाद लेना भी शुभ होता है, जो खुशियों को बढ़ाता है।


दहन के समय क्या करें

होलिका दहन के अवसर पर घर से एक लकड़ी का टुकड़ा लेकर जाएं और उसे अग्नि में डालें। अग्नि को प्रणाम करें और चारों ओर परिक्रमा करें। सुख और समृद्धि की कामना करें। दहन के बाद होलिका की राख से सभी सदस्यों को तिलक करें। ऐसा करने से स्वास्थ्य में सुधार होता है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। शाम का प्रदोष काल सबसे शुभ माना जाता है, इसलिए समय पर पहुंचना आवश्यक है।


परंपरा का संदेश और सावधानियां

होलिका दहन केवल एक रस्म नहीं है, बल्कि यह जीवन का एक महत्वपूर्ण सबक है - बुराई का नाश हो और अच्छाई बनी रहे। पूजा में कोई कमी न रखें, ताकि फल पूर्ण रूप से प्राप्त हो सके। क्षेत्रीय परंपराओं में गन्ना या अन्य चीजें भी शामिल की जाती हैं, उन्हें भी पूजा में शामिल किया जा सकता है। परिवार के साथ मिलकर मनाने से भाईचारा मजबूत होता है। इस बार ग्रहण के कारण तिथि को लेकर कुछ भ्रम था, लेकिन प्रमुख पंचांग 3 मार्च को दहन की तिथि बता रहे हैं।