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NASA का नया सैटेलाइट पृथ्वी के रहस्यों का करेगा अध्ययन

NASA ने हाल ही में एक नया सैटेलाइट लॉन्च किया है, जिसका नाम कैनवास है। यह सैटेलाइट पृथ्वी से निकलने वाली प्राकृतिक और मानव-निर्मित रेडियो तरंगों का अध्ययन करेगा। इसके माध्यम से वैज्ञानिक पृथ्वी के चारों ओर के अंतरिक्ष वातावरण को बेहतर तरीके से समझ सकेंगे और अंतरिक्ष मौसम का सटीक पूर्वानुमान लगाने में सक्षम होंगे। कैनवास का उद्देश्य स्पेसक्राफ्ट और सैटेलाइट्स की सुरक्षा में सुधार करना है। यह मिशन छात्रों और शोधकर्ताओं को अंतरिक्ष हार्डवेयर डिजाइन करने का व्यावहारिक अनुभव भी प्रदान करेगा।
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NASA का नया सैटेलाइट पृथ्वी के रहस्यों का करेगा अध्ययन

NASA का नया मिशन

नई दिल्ली: अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण सैटेलाइट को लॉन्च किया है, जिसका उद्देश्य पृथ्वी से निकलने वाली प्राकृतिक और मानव-निर्मित रेडियो तरंगों का अध्ययन करना है। यह मिशन वैज्ञानिकों को पृथ्वी के चारों ओर के अंतरिक्ष वातावरण को समझने और अंतरिक्ष मौसम का सटीक पूर्वानुमान लगाने में सहायता करेगा।


कैनवास सैटेलाइट का विवरण

कैनवास (क्लाइमेटोलॉजी ऑफ एंथ्रोपोगेनिक एंड नेचुरल वीएएफ वेव एक्टिविटी इन स्पेस) नामक यह क्यूबसैट 7 अप्रैल 2026 को कैलिफोर्निया के वैंडेनबर्ग स्पेस फोर्स बेस से मिनोटौर IV रॉकेट द्वारा लॉन्च किया गया था। यह अमेरिकी रक्षा विभाग के स्पेस टेस्ट प्रोग्राम एस29ए (एसटीपी-एस29ए) का हिस्सा है। इसके लॉन्च की व्यवस्था NASA की क्यूबसैट लॉन्च इनिशिएटिव (सीएलआई) के तहत की गई थी।


सैटेलाइट की कार्यप्रणाली

कैनवास एक 4यू क्यूबसैट है, जिसे कोलोराडो यूनिवर्सिटी, बोल्डर द्वारा विकसित किया गया है। इसका मुख्य कार्य पृथ्वी की निचली कक्षा से बहुत कम आवृत्ति वाली (वीएलएफ) रेडियो तरंगों को मापना है। ये तरंगें बिजली गिरने और जमीन पर स्थित ट्रांसमीटर्स से उत्पन्न होती हैं। यह मापता है कि ये तरंगें पृथ्वी के आयनमंडल से होकर मैग्नेटोस्फीयर तक कितनी मात्रा में पहुंचती हैं। वीएलएफ तरंगें अंतरिक्ष में फंसे हाई एनर्जी वाले इलेक्ट्रॉन्स के रास्ते को थोड़ा बदल सकती हैं, जिससे कभी-कभी ये इलेक्ट्रॉन विकिरण पट्टियों से निकलकर वायुमंडल में प्रवेश कर जाते हैं।


स्पेस वेदर के मॉडल में सुधार

कैनवास इन तरंगों के प्रभाव को समझकर स्पेस वेदर के मॉडलों को मजबूत करेगा, जिससे स्पेसक्राफ्ट, सैटेलाइट्स और पृथ्वी पर बुनियादी ढांचे की सुरक्षा में सुधार होगा। मिशन के दौरान, कैनवास दो मुख्य उपकरणों का उपयोग करेगा: एक त्रि-अक्षीय सर्च कॉइल मैग्नेटोमीटर और एक द्वि-अक्षीय एसी विद्युत क्षेत्र सेंसर। इनकी मदद से यह वीएलएफ तरंगों की शक्ति और दिशा का पता लगाएगा। बिजली गिरने की घटनाओं की तुलना विश्वव्यापी बिजली नेटवर्क के डेटा से करके यह जलवायु संबंधी अध्ययन करेगा कि ये तरंगें आयनमंडल से कैसे गुजरती हैं।


शैक्षिक पहल

नासा ने 2021 में सीएलआई के तहत कैनवास को चुना था। यह कम लागत वाला मिशन छात्रों, शिक्षकों और शोधकर्ताओं को अंतरिक्ष हार्डवेयर डिजाइन करने, विकसित करने और बनाने का व्यावहारिक अनुभव प्रदान करता है। नासा का लॉन्च सर्विसेज प्रोग्राम इस पहल को संचालित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। कैनवास ईलाना 55 लॉन्च ग्रुपिंग का भी हिस्सा है। अगले एक वर्ष तक, कैनवास निरंतर डाटा एकत्र करेगा, जो पृथ्वी से अंतरिक्ष में ऊर्जा के प्रवाह को समझने में सहायक होगा।