केंद्र सरकार का नया कदम: 'वन नेशन, वन KYC' प्रणाली का कार्यान्वयन
नई दिल्ली में वित्त मंत्री का बयान
नई दिल्ली, 28 अप्रैल। भारत की वित्तीय प्रणाली को और अधिक डिजिटल और सुगम बनाने के लिए केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 'वन नेशन, वन KYC' (एकीकृत केवाईसी प्रणाली) को शीघ्रता से लागू करने की आवश्यकता पर बल दिया है। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के 38वें स्थापना दिवस पर आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने बताया कि देश को एक ऐसी पारदर्शी और पोर्टेबल प्रणाली की आवश्यकता है, जिससे आम नागरिकों को विभिन्न सेवाओं के लिए बार-बार दस्तावेज जमा करने की आवश्यकता न पड़े। यह कदम न केवल निवेशकों के अनुभव को बेहतर बनाएगा, बल्कि वित्तीय धोखाधड़ी को भी कम करेगा।
वित्तीय संस्थानों के बीच तालमेल बढ़ेगा
वित्त मंत्री ने SEBI से इस महत्वपूर्ण बदलाव का नेतृत्व करने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि SEBI के पास पहले से ही निवेशकों की बड़ी भागीदारी और एक मजबूत डिजिटल ढांचा है। सरकार चाहती है कि SEBI अन्य नियामकों के साथ मिलकर एक ऐसा डेटाबेस बनाए, जहां एक बार किया गया KYC सभी बैंकों, बीमा कंपनियों, स्टॉक ब्रोकरों और पेंशन फंडों के लिए मान्य हो। वर्तमान में SEBI ने इस दिशा में कुछ प्रगति की है, लेकिन अन्य नियामक संस्थाओं के साथ समन्वय अभी भी आवश्यक है।
फाइलों की दौड़ खत्म होगी
वर्तमान में, यदि कोई व्यक्ति नया बैंक खाता खोलता है, म्यूचुअल फंड में निवेश करता है या बीमा पॉलिसी लेता है, तो उसे हर बार नई KYC प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। इससे न केवल समय की बर्बादी होती है, बल्कि बार-बार व्यक्तिगत जानकारी साझा करने से सुरक्षा का खतरा भी बना रहता है। 'वन नेशन, वन KYC' लागू होने के बाद उपयोगकर्ताओं को केवल एक डिजिटल आईडी या यूनिक KYC नंबर की आवश्यकता होगी। एक बार सत्यापन होने के बाद यह हर वित्तीय प्लेटफॉर्म पर मान्य हो जाएगा, जिससे निवेशकों के लिए 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' का सपना साकार होगा।
डिजिटल और सुरक्षित भविष्य की ओर सरकार का ध्यान
वित्त मंत्री ने कहा कि नई प्रणाली को न केवल सरल बल्कि अत्यधिक सुरक्षित भी होना चाहिए। डिजिटलाइजेशन की मदद से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि डेटा का दुरुपयोग न हो और KYC पोर्टेबल हो, यानी इसे एक संस्थान से दूसरे संस्थान में आसानी से मान्य किया जा सके। सरकार का मानना है कि इस कदम से वित्तीय समावेशन को बढ़ावा मिलेगा और छोटे शहरों के लोग भी बिना किसी तकनीकी रुकावट के शेयर बाजार और अन्य निवेश विकल्पों से जुड़ सकेंगे।
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