क्या टचस्क्रीन कारों की सुरक्षा पर खतरा है?
ड्राइवर की सुरक्षा पर सवाल
नई दिल्ली: जैसे-जैसे कारें अधिक स्मार्ट होती जा रही हैं, ड्राइवर की सुरक्षा को लेकर चिंताएं भी बढ़ रही हैं। स्टीरियो, एसी और नेविगेशन जैसे सामान्य फीचर्स अब भौतिक बटन के बजाय टचस्क्रीन के माध्यम से नियंत्रित किए जा रहे हैं। यह आधुनिक दिखते हैं, लेकिन चलती गाड़ी में यह जोखिम को बढ़ा सकते हैं।
तकनीक का उद्देश्य सुविधा प्रदान करना होना चाहिए, न कि खतरा। इसलिए यह जानना आवश्यक है कि क्या टचस्क्रीन वास्तव में आवश्यक हैं या यह केवल दिखावे का हिस्सा हैं।
नई कारों में टचस्क्रीन का बढ़ता चलन
2023 के बाद से लॉन्च हुई लगभग 97 प्रतिशत नई कारों में सेंट्रल डैशबोर्ड पर टचस्क्रीन का उपयोग किया जा रहा है। इनमें 10 इंच या उससे बड़े डिस्प्ले सामान्य हो गए हैं। म्यूजिक, एसी, नेविगेशन और यहां तक कि बुनियादी नियंत्रण भी अब स्क्रीन पर स्थानांतरित हो गए हैं। कंपनियां इसे प्रीमियम अनुभव बताती हैं, लेकिन ड्राइविंग के दौरान ध्यान भटकने का खतरा नजरअंदाज किया जा रहा है।
टचस्क्रीन की सच्चाई पर रिसर्च
स्वीडन की एक कार मैगजीन Vi Bilagare द्वारा की गई रिसर्च में 11 आधुनिक टचस्क्रीन कारों की तुलना 2005 की Volvo V70 से की गई। 110 किमी प्रति घंटे की गति पर ड्राइव करते समय, टचस्क्रीन वाली कारों में साधारण कार्य करने में 20 सेकंड से अधिक समय लगा, जबकि भौतिक बटन वाली कारों में वही कार्य 10 सेकंड से कम में पूरा हुआ।
सेकंडों का फर्क, जिंदगी पर भारी
20 सेकंड तक सड़क से नजर हटाना बेहद खतरनाक हो सकता है। इस दौरान कार सैकड़ों मीटर आगे बढ़ जाती है। यदि अचानक कोई पैदल यात्री, ब्रेकर या अन्य वाहन सामने आ जाए, तो दुर्घटना होना तय है। टचस्क्रीन में हर बार स्क्रीन देखने की आवश्यकता इस खतरे को और बढ़ा देती है।
सेफ्टी एजेंसियों की चेतावनी
Euro NCAP ने स्पष्ट किया है कि भौतिक बटन ड्राइवर को कम डिस्टर्ब करते हैं। एजेंसी के अनुसार, भविष्य में केवल टचस्क्रीन पर निर्भर कारों को 5-स्टार सेफ्टी रेटिंग मिलना मुश्किल हो सकता है। हॉर्न, वाइपर और इंडिकेटर जैसे आवश्यक नियंत्रण के लिए बटन अनिवार्य किए जा सकते हैं।
भारत में ट्रेंड और आगे की राह
भारत में भी बड़ी टचस्क्रीन वाली कारों का चलन तेजी से बढ़ रहा है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि टचस्क्रीन के साथ वॉइस कमांड और भौतिक बटन का संतुलन आवश्यक है। तकनीक को सुविधा प्रदान करनी चाहिए, लेकिन सुरक्षा से समझौता नहीं होना चाहिए, यही भविष्य की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
