टेस्ट ड्राइव के दौरान ध्यान देने योग्य महत्वपूर्ण बातें
टेस्ट ड्राइव का महत्व
चंडीगढ़, 21 मई। भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग में इन दिनों कई आकर्षक डिज़ाइन और अत्याधुनिक फीचर्स वाली गाड़ियाँ पेश की जा रही हैं। शोरूम का चमकदार माहौल और नई कारें ग्राहकों को तुरंत अपनी ओर खींच लेती हैं। कई लोग केवल कार के बाहरी रूप, ब्रोशर में दिए गए फीचर्स और शोरूम के अनुभव के आधार पर लाखों रुपये की गाड़ी बुक कर देते हैं। लेकिन ऑटो विशेषज्ञों का कहना है कि यह जल्दबाजी बाद में परेशानी का कारण बन सकती है। कार खरीदने का सबसे महत्वपूर्ण चरण होता है 'टेस्ट ड्राइव'। यह वह समय है जब आप जान पाते हैं कि जो गाड़ी बाहर से इतनी आकर्षक दिख रही है, क्या वह आपकी ड्राइविंग शैली और परिवार की आवश्यकताओं के अनुसार है या नहीं।
सही सीटिंग पोजिशन
क्या आपके शरीर के हिसाब से परफेक्ट है सीट?
टेस्ट ड्राइव की शुरुआत अपने आराम को चेक करने से करें। जैसे ही आप ड्राइवर सीट पर बैठें, सबसे पहले सीट की स्थिति, रीक्लाइन एंगल और अंडर-थाई सपोर्ट को महसूस करें। यह देखना जरूरी है कि स्टीयरिंग व्हील को पकड़ने में आपके हाथ को आराम मिल रहा है या नहीं और एक्सीलेटर, ब्रेक और क्लच पैडल तक आपके पैर सही तरीके से पहुंच रहे हैं या नहीं। यदि ड्राइविंग पोजिशन आरामदायक नहीं है, तो लंबी यात्रा के दौरान आपको पीठ और पैरों में दर्द हो सकता है। इसलिए सीट एडजस्टमेंट और कार के ओवरऑल एर्गोनॉमिक्स को ध्यान से चेक करें।
प्रैक्टिकल पिकअप का परीक्षण
प्रैक्टिकल पिकअप देखें
कई बार कागजों पर कार का इंजन बहुत शक्तिशाली लगता है, लेकिन असल सड़क पर उसकी परफॉर्मेंस अलग होती है। टेस्ट ड्राइव के दौरान कार का एक्सीलरेशन कितना स्मूथ है, यह देखना जरूरी है। गियर बदलते समय या अचानक स्पीड बढ़ाते समय गाड़ी का पिकअप कैसा है, इस पर ध्यान दें। सबसे अच्छा यह होगा कि आप कार को खाली सड़कों पर ही नहीं, बल्कि शहर के ट्रैफिक और हाईवे दोनों पर चलाकर इंजन के व्यवहार को समझें।
स्टेबिलिटी की जांच
स्टेबिलिटी की जांच है जरूरी
आपकी कार पर नियंत्रण पूरी तरह से स्टीयरिंग और ब्रेकिंग सिस्टम पर निर्भर करता है। टेस्ट ड्राइव के दौरान ध्यान दें कि स्टीयरिंग व्हील बहुत भारी या बहुत हल्का तो नहीं है। एक आदर्श स्टीयरिंग वह है जो कम गति में मोड़ने में आसान हो और हाईवे पर तेज गति में थोड़ा भारी हो। इसके साथ ही, सुरक्षित स्थान पर थोड़े कड़े ब्रेक लगाकर देखें। ब्रेकिंग के दौरान कार को पूरी तरह स्थिर महसूस होना चाहिए।
खराब रास्तों पर परीक्षण
खराब रास्तों और स्पीड ब्रेकर्स पर लें असली परीक्षा
अधिकतर टेस्ट ड्राइव के लिए शोरूम वाले साफ और सपाट सड़कों का रूट चुनते हैं। लेकिन आपको अपनी कार को भारत के गड्ढों और स्पीड ब्रेकर्स वाले रास्तों पर चलाना है। इसलिए जानबूझकर कार को खराब रास्तों और स्पीड ब्रेकर्स पर चलाएं। ध्यान दें कि झटके केबिन के अंदर बैठे यात्रियों तक कितने पहुंच रहे हैं।
टेस्ट ड्राइव चेकलिस्ट
| टेस्ट ड्राइव चेकलिस्ट | क्या चेक करें? | क्यों है जरूरी? |
| कंफर्ट और व्यू | सीट पॉजिशन और ब्लाइंड स्पॉट्स | लंबी ड्राइविंग में थकान और हादसों से बचाव के लिए। |
| इंजन और गियर | सिटी व हाईवे पर पिकअप और रिस्पॉन्स | ओवरटेकिंग और डेली कम्यूट में स्मूथनेस के लिए। |
| राइड और हैंडलिंग | सस्पेंशन, ब्रेकिंग स्टेबिलिटी और स्टीयरिंग | खराब रास्तों पर कंफर्ट और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए। |
| केबिन का माहौल | एनवीएच (NVH) लेवल्स और एसी | शांत केबिन और आरामदायक सफर के लिए। |
सुरक्षा पर ध्यान दें
स्टाइलिश डिजाइन के चक्कर में सुरक्षा न चूकें
आजकल कार कंपनियां गाड़ियों को स्पोर्टी लुक देने के लिए पीछे के शीशे को छोटा या स्लोपिंग डिजाइन का बना देती हैं। इससे कार बाहर से अच्छी लगती है, लेकिन ड्राइवर सीट से पीछे का व्यू कम हो जाता है। टेस्ट ड्राइव के दौरान आगे, पीछे और साइड के ओआरवीएम से दिखने वाले व्यू का आकलन करें।
केबिन नॉइस और इंफोटेनमेंट
केबिन नॉइस और इंफोटेनमेंट
लॉन्ग ड्राइव पर जाने वाले लोगों के लिए कार का केबिन शांत होना बेहद जरूरी है। ड्राइविंग के दौरान सभी खिड़कियां बंद कर दें और ध्यान से सुनें कि क्या इंजन की आवाज, टायरों के सड़क पर घिसने का शोर या बाहर का ट्रैफिक केबिन के अंदर ज्यादा आ रहा है। इसके साथ ही, कार के टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम की फंक्शनिंग, एसी की कूलिंग स्पीड और स्पीकर्स की साउंड क्वालिटी को खुद ऑपरेट करके देखें।
