निसान की नई प्रीमियम एसयूवी: फॉर्च्यूनर को मिलेगी कड़ी टक्कर
नई एसयूवी का आगाज़
नई दिल्ली: भारतीय ऑटोमोबाइल क्षेत्र में निसान टेरानो पर आधारित एक नया कॉन्सेप्ट चर्चा का केंद्र बन गया है। इसकी मस्कुलर डिज़ाइन और आकर्षक स्टाइलिंग ने सभी का ध्यान खींचा है। ऑटो बाजार में यह कयास लगाए जा रहे हैं कि निसान जल्द ही इस शानदार कॉन्सेप्ट पर आधारित एक नई प्रीमियम एसयूवी को भारत में लॉन्च कर सकती है, जो एसयूवी प्रेमियों के लिए एक बड़ा सरप्राइज साबित होगी।
निसान का पोर्टफोलियो विस्तार
निसान भारतीय बाजार में अपनी स्थिति को मजबूत करने के लिए पूरी तरह से तैयार है। वर्तमान में, कंपनी 'टेक्टॉन' एसयूवी पेश कर रही है और जल्द ही इसका एक बड़ा थ्री-रो वर्जन भी लाने वाली है। इन नई कारों के लॉन्च से कंपनी का पोर्टफोलियो काफी विस्तारित होगा, जिससे उसके पास कुल चार मॉडल होंगे। हालांकि, ये सभी मॉडल रेनो की गाड़ियों के प्लेटफॉर्म पर आधारित हैं।
फॉर्च्यूनर और ग्लॉस्टर को मिलेगी टक्कर
निसान के प्रेसिडेंट थिएरी सब्बाग ने संकेत दिए हैं कि कंपनी भारत में एक नया और बड़ा प्रोडक्ट लाने की योजना बना रही है। चर्चा है कि बीजिंग ऑटो शो में प्रदर्शित टेरानो कॉन्सेप्ट को भारतीय बाजार में उतारा जा सकता है। यदि यह कार भारत में आती है, तो इसका मुकाबला टोयोटा फॉर्च्यूनर और एमजी ग्लॉस्टर जैसी प्रमुख एसयूवी से होगा। खास बात यह है कि प्लगइन हाइब्रिड अवतार में आने के कारण इसका माइलेज अन्य एसयूवी के मुकाबले बेहतर होगा।
चीनी साझेदार डोंगफेंग के साथ सहयोग
निसान इस प्रीमियम कार को अपने चीनी साझेदार डोंगफेंग के सहयोग से विकसित कर सकती है। दोनों कंपनियां चीन में एक जॉइंट वेंचर के तहत काम कर रही हैं, जहां गाड़ियों का निर्माण काफी किफायती है। चीन में वाहन विकास की गति भी तेज है, जिससे निसान-डोंगफेंग जॉइंट वेंचर नए मॉडल को महज तीस महीनों में तैयार करने की क्षमता रखता है।
चेन्नई प्लांट में उत्पादन की संभावना
भारत में इस नई एसयूवी की सफलता के लिए इसकी स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग आवश्यक है। निसान के पास चेन्नई प्लांट में उत्पादन का अधिकार है, जिसकी वार्षिक क्षमता 2.5 लाख यूनिट है। इस विशाल प्लांट की कुल उत्पादन क्षमता हर साल पांच लाख यूनिट है, जिसका पूरा उपयोग नहीं हो रहा है। ऐसे में, डोंगफेंग रेंज की नई गाड़ियों का निर्माण इस प्लांट में आसानी से किया जा सकेगा।
