पावर स्टीयरिंग की समस्याएं और समाधान: जानें कैसे करें सुधार
पावर स्टीयरिंग की समस्याएं
नई दिल्ली: सड़क पर गाड़ी चलाने वाले कई ड्राइवरों को कभी-कभी स्टीयरिंग को घुमाने में कठिनाई का सामना करना पड़ता है, भले ही उनकी कार में पावर स्टीयरिंग हो। यह समस्या आमतौर पर पुरानी या मध्यम श्रेणी की हाइड्रोलिक पावर स्टीयरिंग वाली कारों में देखी जाती है। यदि इस पर ध्यान नहीं दिया गया, तो यह छोटी समस्या बड़ी खराबी में बदल सकती है। आइए जानते हैं इसके कारण और समाधान।
पावर स्टीयरिंग भारी होने के कारण
यदि स्टीयरिंग घुमाने में अधिक प्रयास करना पड़ रहा है, तो सबसे पहले पावर स्टीयरिंग फ्लूइड की जांच करें। फ्लूइड की कमी से सिस्टम में दबाव नहीं बनता है। इसके अलावा, लीक होने के कारण तेल की मात्रा कम होती रहती है। कभी-कभी पुराना तेल गाढ़ा हो जाता है या सिस्टम में हवा घुस जाती है, जिससे अजीब आवाजें भी सुनाई देती हैं।
फ्लूइड की जांच और सुधार
कार को समतल स्थान पर पार्क करें और इंजन बंद करें। पावर स्टीयरिंग की टंकी खोलकर लेवल की जांच करें। यदि लेवल न्यूनतम से नीचे है, तो कंपनी द्वारा सुझाए गए सही ग्रेड का तेल डालें। टंकी को ओवरफिल न करें। तेल डालने के बाद कार को चलाकर टेस्ट करें। यदि समस्या बनी रहे, तो तुरंत मैकेनिक से संपर्क करें।
हाइड्रोलिक पावर स्टीयरिंग सिस्टम का कार्य
हाइड्रोलिक सिस्टम में इंजन से जुड़ा पंप तेल पर दबाव बनाता है। यह दबाव पाइपों के माध्यम से स्टीयरिंग रैक तक पहुंचता है, जिससे पहियों को घुमाना आसान हो जाता है। तेल पूरे सिस्टम में लगातार घूमता रहता है, इसलिए नियमित रूप से तेल का स्तर और गुणवत्ता की जांच करना आवश्यक है।
इलेक्ट्रिक पावर स्टीयरिंग के लाभ
नई कारों में इलेक्ट्रिक पावर स्टीयरिंग (EPS) का उपयोग बढ़ रहा है। यह इंजन पर बोझ नहीं डालती, जिससे माइलेज में सुधार होता है। इसमें तेल की आवश्यकता नहीं होती और लेन असिस्ट, ऑटो पार्किंग जैसे स्मार्ट फीचर्स को आसानी से जोड़ा जा सकता है। रखरखाव भी कम होता है।
पावर स्टीयरिंग का दिलचस्प इतिहास
पावर स्टीयरिंग की शुरुआत 1926 में फ्रांसिस डब्ल्यू. डेविस द्वारा की गई थी। इसका पहला उपयोग दूसरे विश्व युद्ध के भारी वाहनों में हुआ। 1951 में क्रिसलर इंपीरियल पहली व्यावसायिक कार बनी जिसमें यह फीचर था। आज यह हर कार में सामान्य हो गया है और ड्राइविंग को सुरक्षित और आरामदायक बनाता है।
