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पेट्रोल और डीजल की कीमतों में संभावित वृद्धि: चुनावों के बाद हो सकता है बड़ा बदलाव

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के चलते भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में संभावित वृद्धि की आशंका जताई जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, चुनावों के बाद कंपनियां दाम बढ़ा सकती हैं। भारत अपनी जरूरत का 88% कच्चा तेल आयात करता है, और इस स्थिति का असर चालू खाता घाटे पर भी पड़ सकता है। जानें इस मुद्दे के पीछे के कारण और इसके संभावित प्रभावों के बारे में।
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पेट्रोल और डीजल की कीमतों में संभावित वृद्धि: चुनावों के बाद हो सकता है बड़ा बदलाव

पेट्रोल और डीजल की कीमतों में संभावित वृद्धि


नई दिल्ली। कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि के कारण पेट्रोल की कीमत 18 रुपये और डीजल की कीमत 35 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ सकती है। एक विदेशी ब्रोकरेज फर्म की रिपोर्ट के अनुसार, क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतों के बावजूद देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं, जिससे कंपनियों को नुकसान हो रहा है। ऐसे में पश्चिम बंगाल समेत पांच राज्यों में चुनाव समाप्त होने के बाद कंपनियां दाम बढ़ाने का निर्णय ले सकती हैं।


कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि के कारण कंपनियों को प्रति लीटर पेट्रोल पर 18 रुपये और डीजल पर 35 रुपये का घाटा हो रहा है। पिछले महीने, इन कंपनियों को हर दिन लगभग 2,400 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा था, जो कि एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपये की कटौती के बाद घटकर 1,600 करोड़ रुपये रह गया है। हर 10 डॉलर की वृद्धि से नुकसान लगभग 6 रुपये प्रति लीटर बढ़ जाता है।


भारत का कच्चा तेल आयात


भारत अपनी आवश्यकताओं का लगभग 88 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है, जिसमें से 45 प्रतिशत मध्य पूर्व और 35 प्रतिशत रूस से आता है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें न केवल तेल कंपनियों के लिए, बल्कि देश के चालू खाता घाटे (CAD) के लिए भी खतरा बन रही हैं। अनुमान है कि 2026 की पहली तिमाही में यह घाटा 20 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।


एक्साइज ड्यूटी में कमी


सरकारी राजस्व में तेल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी का योगदान लगातार घट रहा है। वित्त वर्ष 2017 में यह 22 प्रतिशत था, जो अब घटकर केवल 8 प्रतिशत रह गया है। यदि सरकार पूरी एक्साइज ड्यूटी हटा भी दे, तो भी मौजूदा कीमतों पर तेल कंपनियों का घाटा समाप्त नहीं होगा।


अन्य देशों में कीमतों में वृद्धि


अमेरिका में पेट्रोल की औसत कीमतें अगस्त 2022 के बाद पहली बार 4 डॉलर प्रति गैलन से ऊपर पहुंच गई हैं। इसके अलावा, पाकिस्तान, नेपाल और श्रीलंका जैसे पड़ोसी देशों ने भी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि की है।


भारत में कीमतों का निर्धारण


जून 2010 तक, सरकार पेट्रोल की कीमतें निर्धारित करती थी और हर 15 दिन में इसे संशोधित किया जाता था। 26 जून 2010 के बाद, सरकार ने पेट्रोल की कीमतों का निर्धारण तेल कंपनियों पर छोड़ दिया। इसी तरह, अक्टूबर 2014 तक डीजल की कीमतें भी सरकार द्वारा निर्धारित की जाती थीं, लेकिन 19 अक्टूबर 2014 से यह कार्य भी तेल कंपनियों को सौंप दिया गया। वर्तमान में, तेल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत, विनिमय दर, कर, पेट्रोल-डीजल के परिवहन का खर्च और अन्य कई कारकों को ध्यान में रखते हुए रोजाना कीमतें तय करती हैं।