ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक: पश्चिम एशिया के संघर्ष पर ध्यान देने की आवश्यकता
ब्रिक्स विदेश मंत्रियों का शिखर सम्मेलन
नई दिल्ली: भारत मंडपम में ब्रिक्स विदेश मंत्रियों का दो दिवसीय शिखर सम्मेलन गुरुवार को शुरू हुआ। विदेश मंत्री एस जयशंकर की अध्यक्षता में यह बैठक 14 और 15 मई, 2026 को आयोजित की जा रही है। उन्होंने उद्घाटन भाषण में कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।
वैश्विक चुनौतियों का सामना
जयशंकर ने बताया कि दुनिया में चल रहे संघर्ष, आर्थिक अस्थिरता और व्यापार व प्रौद्योगिकी से संबंधित समस्याएं वैश्विक परिदृश्य को प्रभावित कर रही हैं। उन्होंने समुद्री यातायात में जोखिम और ऊर्जा बुनियादी ढांचे में रुकावटों की गंभीरता को उजागर किया। उन्होंने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर जैसे अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से सुरक्षित समुद्री आवाजाही वैश्विक आर्थिक भलाई के लिए आवश्यक है। गाज़ा में चल रहे संघर्ष के मानवीय परिणामों पर भी चिंता व्यक्त की।
एकतरफा उपायों पर ध्यान
विदेश मंत्री ने फ़िलिस्तीन के मुद्दे पर भारत के 'दो-राष्ट्र समाधान' के समर्थन की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि हमें उन एकतरफा उपायों और प्रतिबंधों पर ध्यान देना चाहिए जो अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप नहीं हैं। ऐसे उपाय विकासशील देशों पर असमान प्रभाव डालते हैं और बातचीत का विकल्प नहीं हो सकते।
ब्रिक्स बैठक का महत्व
जयशंकर ने प्रतिनिधिमंडल को उनकी उपस्थिति के लिए धन्यवाद दिया और कहा कि ब्रिक्स बैठक एक विशेष अवसर है। यह हमें विचार साझा करने और आपसी सहमति बनाने का मौका देता है, जो इस जटिल और अनिश्चित दुनिया में और भी महत्वपूर्ण है।
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