भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए पीएम ई-ड्राइव योजना का विस्तार
सरकार ने पीएम ई-ड्राइव योजना का विस्तार किया
नई दिल्ली: भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के भविष्य को मजबूत करने के लिए सरकार ने पीएम ई-ड्राइव योजना के विस्तार की घोषणा की है। आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, जो 27 मार्च 2026 को जारी की गई थी, इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों और ई-रिक्शा के लिए सब्सिडी की अवधि अब क्रमशः जुलाई 2026 और मार्च 2028 तक बढ़ा दी गई है। यह निर्णय पारंपरिक ईंधन वाहनों पर कर कटौती के कारण उत्पन्न बाजार की सुस्ती को दूर करने के लिए लिया गया है, जिससे हरित परिवहन को नया प्रोत्साहन मिलेगा।
इलेक्ट्रिक दोपहिया और ई-रिक्शा के लिए सब्सिडी का विस्तार
सरकार ने इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों के लिए सब्सिडी को 31 जुलाई 2026 तक बढ़ा दिया है। इसके साथ ही, ई-रिक्शा और ई-कार्ट के लिए इसे 31 मार्च 2028 तक बढ़ाया गया है। मंत्रालय ने लक्ष्यों में भी महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं, जिसमें दोपहिया वाहनों की बिक्री का लक्ष्य 14 लाख से बढ़ाकर 24.8 लाख कर दिया गया है। इसी तरह, ई-रिक्शा के लक्ष्य को 36,400 से बढ़ाकर 39,000 के पार पहुंचा दिया गया है।
ऑटोमोबाइल उद्योग की चिंताएं
ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री की मांग और बढ़ती चिंताएं
इस विस्तार के पीछे बजाज ऑटो, हीरो मोटोकॉर्प और टीवीएस जैसी प्रमुख कंपनियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इन कंपनियों ने सियाम (SIAM) के माध्यम से सरकार से सब्सिडी बढ़ाने की मांग की थी। उद्योग का मानना है कि यदि प्रोत्साहन राशि की समयसीमा नहीं बढ़ाई गई, तो आवंटित बजट का बड़ा हिस्सा बिना इस्तेमाल के रह जाएगा। वाहन निर्माताओं को चिंता थी कि सब्सिडी समाप्त होने से दोपहिया वाहनों की कीमतें अचानक 5,000 रुपये तक बढ़ सकती हैं।
बजट आवंटन और बिक्री के आंकड़े
बजट आवंटन और बिक्री के ताजा आंकड़े
पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत कुल 1,772 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है, जिसमें से 1,259.91 करोड़ रुपये विशेष रूप से दोपहिया वाहनों के लिए आवंटित हैं। सरकार प्रति वाहन 5,000 रुपये का प्रोत्साहन देती है, जो वाहन की कीमत का लगभग 5 प्रतिशत होता है। अब तक लगभग 10 लाख इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन बेचे जा चुके हैं। जहां ई-थ्री-व्हीलर ने अपने लक्ष्यों को पार कर लिया है, वहीं ई-रिक्शा श्रेणी में अभी लंबी दूरी तय करना बाकी है।
हरित भविष्य की दिशा में कदम
हरित भविष्य और उत्सर्जन कम करने का संकल्प
सितंबर 2024 में 10,900 करोड़ रुपये के साथ शुरू हुई यह योजना भारत के स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों की धुरी है। देश की कुल वाहन बिक्री में 75 प्रतिशत से अधिक हिस्सा दोपहिया वाहनों का है। इसलिए इस क्षेत्र में बदलाव लाना उत्सर्जन कम करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण है। सब्सिडी को 2028 तक बढ़ाकर सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह देश में चार्जिंग बुनियादी ढांचे और इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
