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मिडिल ईस्ट तनाव से LNG सप्लाई पर खतरा, भारत पर पड़ेगा असर

मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के कारण LNG सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है, जिससे भारत जैसे देशों पर गंभीर असर पड़ सकता है। कतर के रास लाफान पर हमलों ने वैश्विक गैस सप्लाई को खतरे में डाल दिया है। जानें इस स्थिति का विस्तार से।
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मिडिल ईस्ट तनाव से LNG सप्लाई पर खतरा, भारत पर पड़ेगा असर

वैश्विक ऊर्जा सप्लाई चेन पर प्रभाव


मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के चलते वैश्विक ऊर्जा सप्लाई चेन में बाधा उत्पन्न हो गई है। कतर के रास लाफान इंडस्ट्रियल सिटी पर हुए हमलों ने दुनिया के सबसे बड़े LNG हब को प्रभावित किया है। इस स्थिति के कारण वैश्विक गैस सप्लाई पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है। कतर ने फिलहाल LNG का उत्पादन रोक दिया है, जिसका सीधा असर भारत जैसे देशों पर पड़ सकता है, जो अन्य देशों पर निर्भर हैं।


इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष

इजरायल और अमेरिका के साथ ईरान के बीच शुरू हुए संघर्ष ने अब एक व्यापक रूप ले लिया है। ईरान ने कतर के रास लाफान और मेसाइड इंडस्ट्रियल सिटी पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए हैं, जिसके परिणामस्वरूप कंपनी ने फोर्स मेज्योर की घोषणा की। इससे वैश्विक LNG का लगभग 20% हिस्सा प्रभावित हुआ है। गैस की कीमतें यूरोप और एशिया में तेजी से बढ़ रही हैं, जिससे उत्पादन और परिवहन प्रक्रिया की जानकारी होना आवश्यक है।


कतर में LNG प्लांट पर हमले का असर

रास लाफान दुनिया का सबसे बड़ा LNG एक्सपोर्ट टर्मिनल है, और ईरान के हमले ने इसे गंभीर नुकसान पहुंचाया है। कतर एनर्जी के सीईओ साद अल-काबी ने बताया कि हमले के बाद 17% एक्सपोर्ट क्षमता प्रभावित हुई है। इसे ठीक करने में 3 से 5 साल लग सकते हैं, जिससे सालाना 20 अरब डॉलर का नुकसान हो सकता है। लिक्विफाइड नेचुरल गैस के उत्पादन में एक लंबी प्रक्रिया अपनाई जाती है।


LNG और CNG के बीच का अंतर

LNG को -162 डिग्री सेल्सियस पर ठंडा करके तरल रूप में परिवर्तित किया जाता है, जिससे इसका आयतन 600 गुना कम हो जाता है और परिवहन तथा भंडारण में आसानी होती है। यह प्रक्रिया 19वीं सदी से चली आ रही है। वहीं, CNG उच्च दबाव में संकुचित गैस होती है, जो LNG से री-गैसीफिकेशन के बाद बनती है। CNG का उपयोग वाहनों में किया जाता है और इसे सस्ती तथा स्वच्छ ईंधन माना जाता है।


भारत की LNG निर्भरता

भारत दुनिया के प्रमुख LNG आयातकों में से एक है, जहां इसकी कुल जरूरत का लगभग 50 प्रतिशत आयात से पूरा होता है। इसमें से लगभग 45% LNG कतर से आती है। अब सप्लाई रुकने के कारण कीमतों में वृद्धि हो सकती है, जिससे उद्योग, पावर और घरेलू उपयोग प्रभावित हो सकता है। LNG अब केवल ईंधन नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति का एक महत्वपूर्ण हथियार बन चुकी है।