Newzfatafatlogo

रोहतक में किसानों और बीमा कंपनी के बीच मुआवजे का विवाद बढ़ा

रोहतक जिले के किसानों और बीमा कंपनी के बीच मुआवजे को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। किसानों का आरोप है कि प्राकृतिक आपदा के बाद उनकी फसलें बर्बाद हो गईं, लेकिन बीमा कंपनी ने दस्तावेजों की कमी का बहाना बनाकर उनके क्लेम खारिज कर दिए। कृषि विभाग ने इस मामले में सख्त रुख अपनाया है और किसानों को न्याय दिलाने का आश्वासन दिया है। जानें इस विवाद की पूरी कहानी और किसानों की समस्याएं।
 | 
रोहतक में किसानों और बीमा कंपनी के बीच मुआवजे का विवाद बढ़ा

किसानों और बीमा कंपनी के बीच टकराव

रोहतक जिले के किसानों और बीमा कंपनी के बीच रबी फसल 2024-25 के मुआवजे को लेकर विवाद गहरा गया है। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत 1200 से अधिक क्लेम फॉर्म रद्द करने पर सख्त रुख अपनाते हुए बीमा कंपनी से स्पष्टीकरण मांगा है। किसानों का आरोप है कि प्राकृतिक आपदा के कारण फसल बर्बाद होने पर जब उन्हें आर्थिक सहायता की आवश्यकता थी, तब कंपनी ने दस्तावेजों की कमी का बहाना बनाकर उनके आवेदन खारिज कर दिए।


प्रीमियम लौटाने पर किसानों का गुस्सा

नुकसान के बाद प्रीमियम लौटाने पर फूटा गुस्सा


बीमा कंपनी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं, जब उसने बिना किसी पूर्व सूचना के किसानों के खातों में प्रीमियम की राशि वापस कर दी। इस कदम ने किसानों के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम किया है। कृषि विभाग के उप-निदेशक डॉ. सुरेंद्र मलिक ने स्पष्ट किया है कि किसानों के साथ किसी भी प्रकार का अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कंपनी ने नियमों का उल्लंघन कर क्लेम रद्द किए हैं, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी ताकि किसानों को पूरा मुआवजा मिल सके।


अटल सेवा केंद्रों पर आरोप

अटल सेवा केंद्र या कंपनी की लापरवाही?


बीमा कंपनी अपनी सफाई में अटल सेवा केंद्रों पर दोष मढ़ रही है। कंपनी का कहना है कि केंद्रों द्वारा अपलोड किए गए दस्तावेज अधूरे थे, जिससे क्लेम प्रोसेस नहीं हो सके। हालांकि, विभाग इस मामले की गहराई से जांच कर रहा है ताकि सही स्थिति का पता लगाया जा सके। कई किसान ऐसे हैं जिनका लाखों रुपये का क्लेम फंसा हुआ है, जिससे उनके सामने परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल हो गया है।


डीसी ऑफिस में मुआवजे का मामला

डीसी ऑफिस तक पहुंची मुआवजे की गूंज


किसान अपनी मेहनत की कमाई की आस में पिछले कई महीनों से सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। जिला मुख्यालय से लेकर तहसील स्तर तक धरने और विरोध प्रदर्शनों का दौर जारी है। अब यह मामला उपायुक्त (DC) के पास पहुंच गया है, जिन्होंने बीमा कंपनी के प्रतिनिधियों को बुलाकर स्पष्ट निर्देश दिया है कि मुआवजे का निपटारा जल्द से जल्द किया जाए। रबी फसलों के बीमा की समय सीमा हर साल 31 दिसंबर होती है, लेकिन समय पर प्रीमियम भरने के बावजूद किसान खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।