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स्लीपर बसों के निर्माण के लिए नए सुरक्षा मानक लागू: नितिन गडकरी

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने घोषणा की है कि स्लीपर बसों का निर्माण अब केवल मान्यता प्राप्त संस्थानों द्वारा किया जाएगा। यह निर्णय स्लीपर कोच बसों में आग की घटनाओं को रोकने के लिए लिया गया है। नए सुरक्षा मानकों के तहत मौजूदा बसों को भी अपडेट करना होगा। गडकरी ने बताया कि पिछले 6 महीनों में स्लीपर कोच बसों में आग लगने के कई हादसे हुए हैं, जिनमें 145 लोगों की जान गई।
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स्लीपर बसों के निर्माण के लिए नए सुरक्षा मानक लागू: नितिन गडकरी

स्लीपर बसों के निर्माण पर नई पाबंदियाँ


स्लीपर कोच बसों में आग की घटनाओं पर नियंत्रण के लिए उठाया गया कदम


नई दिल्ली: केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने घोषणा की है कि अब केवल ऑटोमोबाइल कंपनियां या सरकारी मान्यता प्राप्त संस्थान ही स्लीपर बसों का निर्माण कर सकेंगे। यह निर्णय स्लीपर कोच बसों में बढ़ती आग की घटनाओं को रोकने के लिए लिया गया है।


सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य

गडकरी ने बताया कि मौजूदा स्लीपर बसों को नए सुरक्षा मानकों के अनुसार अपडेट करना आवश्यक होगा। उन्होंने कहा कि भारत का बस बॉडी कोड एआईएस-052 सभी बसों के लिए सुरक्षा, संरचना और डिजाइन से संबंधित मानक निर्धारित करता है।


एआईएस-052 का महत्व

यह कोड असंगठित बस बॉडी-बिल्डिंग क्षेत्र को नियंत्रित करने, यात्रियों और चालकों की सुरक्षा बढ़ाने और बस कोच उत्पादन में समानता लाने के लिए लागू किया गया है। गडकरी ने कहा कि मंत्रालय ने संशोधित बस बॉडी कोड को 1 सितंबर 2025 से लागू करने का निर्णय लिया है।


स्लीपर कोच बसों में सुरक्षा उपाय

गडकरी ने बताया कि स्लीपर कोच बसों में फायर डिटेक्शन सिस्टम, आपातकालीन निकास, इमरजेंसी लाइटिंग और ड्राइवर की नींद की चेतावनी देने वाले संकेतक लगाना अनिवार्य होगा। पिछले 6 महीनों में स्लीपर कोच बसों में आग लगने के 6 बड़े हादसे हुए हैं, जिनमें 145 लोगों की जान गई।