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हरियाणा में चुकंदर की खेती से किसानों की आय में वृद्धि

हरियाणा के रोहतक जिले में चुकंदर की खेती ने किसानों की आर्थिक स्थिति में महत्वपूर्ण बदलाव लाया है। कम लागत और त्वरित उत्पादन के कारण, किसान अब प्रति एकड़ डेढ़ लाख रुपये से अधिक की कमाई कर रहे हैं। इस लेख में जानें कि कैसे इंटरनेट और सरकारी नीतियों ने किसानों को नई तकनीक अपनाने के लिए प्रेरित किया है और किस प्रकार चुकंदर की खेती उनके लिए एक सुनहरा अवसर बन गई है।
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हरियाणा में चुकंदर की खेती से किसानों की आय में वृद्धि

हरियाणा में खेती का नया रूप

रोहतक, 17 अप्रैल। हरियाणा की उपजाऊ भूमि पर खेती का तरीका अब बदलने लगा है। राज्य सरकार की प्रोत्साहन नीतियों के कारण, रोहतक जिले के किसान अब पारंपरिक खेती को छोड़कर बागवानी और नकदी फसलों की ओर बढ़ रहे हैं। इस बदलाव में 'चुकंदर' किसानों के लिए एक सुनहरा अवसर बनकर उभरा है। कम लागत और त्वरित उत्पादन के चलते, इस फसल ने कई गांवों की आर्थिक स्थिति में सुधार किया है। किसान अब प्रति एकड़ डेढ़ लाख रुपये से अधिक की कमाई कर रहे हैं, जिससे उनकी आय दोगुनी हो गई है।


कम निवेश और अधिक लाभ

20 हजार का निवेश और डेढ़ लाख की कमाई

इस नए खेती के मॉडल में लागत और लाभ का अनुपात बहुत आकर्षक है। मांढी जाटान गांव के किसान जसबीर ग्रेवाल के अनुसार, एक एकड़ में चुकंदर की बुवाई से लेकर कटाई तक लगभग 20 हजार रुपये का खर्च आता है। वहीं, उत्पादन की बात करें तो प्रति एकड़ लगभग 250 क्विंटल तक फसल मिलती है। बाजार में चुकंदर की मांग को देखते हुए, किसानों को 1 लाख से 1.60 लाख रुपये तक की आमदनी हो रही है। जसबीर जैसे कई किसान अब इंटरनेट की मदद से साल में दो बार चुकंदर की फसल ले रहे हैं।


कम बीमारियों और त्वरित फसल

बीमारियों का कम डर और महज 80 दिन में फसल तैयार

चुकंदर की खेती का एक बड़ा लाभ इसकी मजबूती है। जसबीर ग्रेवाल के अनुभव के अनुसार, इस फसल में कीटों और फफूंद का खतरा काफी कम होता है, जिससे महंगी दवाओं की आवश्यकता नहीं पड़ती। यह फसल मध्यम तापमान में भी अच्छी तरह से विकसित होती है और केवल 70-80 दिनों में मंडी में बिकने के लिए तैयार हो जाती है। कम जोखिम और सुनिश्चित बाजार मूल्य के कारण, यह उन किसानों के लिए एक बेहतरीन विकल्प बन गई है, जो पारंपरिक फसलों से संतुष्ट नहीं थे।


नई तकनीक और सरकारी सहायता

इंटरनेट और सरकारी नीतियों ने दिखाई नई राह

किसान अब धान और गेहूं तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि 'स्मार्ट फार्मिंग' की ओर बढ़ रहे हैं। जसबीर ने बताया कि उन्होंने चुकंदर की खेती की तकनीक इंटरनेट के माध्यम से सीखी और इसे अपनाने का निर्णय लिया। अब वे अन्य किसानों को भी सलाह दे रहे हैं कि सही बीज और बेहतर प्रबंधन के साथ चुकंदर जैसी नकदी फसलों को अपनाकर अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत किया जा सकता है। हरियाणा सरकार द्वारा दी जा रही प्रोत्साहन राशि ने भी किसानों का हौसला बढ़ाया है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में बागवानी का क्षेत्र तेजी से बढ़ रहा है।