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IMF की चेतावनी: 2029 तक वैश्विक कर्ज GDP के 100% तक पहुंच सकता है

IMF की हालिया रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि 2029 तक वैश्विक सरकारी कर्ज GDP के 100% तक पहुंच सकता है। इस संकट के पीछे कई कारण हैं, जैसे वैश्विक तनाव, महंगाई और बढ़ती ब्याज दरें। हालांकि, भारत को इस स्थिति में एक सकारात्मक उदाहरण बताया गया है, जहां कर्ज-GDP अनुपात नियंत्रित है। जानें इस रिपोर्ट के प्रमुख बिंदुओं और भारत की आर्थिक स्थिति के बारे में।
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IMF की चेतावनी: 2029 तक वैश्विक कर्ज GDP के 100% तक पहुंच सकता है

वैश्विक आर्थिक संकट की चेतावनी


दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए एक गंभीर चेतावनी सामने आई है, जिसमें इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड (IMF) की फिस्कल मॉनिटर रिपोर्ट ने बताया है कि 2029 तक वैश्विक सरकारी कर्ज, कुल GDP के 100% तक पहुंच सकता है। इसका मतलब है कि जितना पैसा दुनिया एक साल में कमाएगी, उतना ही कर्ज चुकाना होगा। इस संकट से बचने के लिए IMF ने देशों को खर्चों पर नियंत्रण रखने की सलाह दी है।


80 साल पहले जैसा संकट

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कर्ज का यह स्तर आखिरी बार दूसरे विश्व युद्ध के बाद देखा गया था। वर्तमान में स्थिति और भी गंभीर है। उस समय कर्ज का मुख्य कारण युद्ध और बुनियादी ढांचे पर खर्च था, जबकि आज के हालात में युद्ध, बढ़ते राजकोषीय घाटे, ऊंची ब्याज दरें और भू-राजनीतिक तनाव शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 2025 तक वैश्विक कर्ज GDP के लगभग 94% तक पहुंच जाएगा।


IMF के अनुसार तीन प्रमुख कारण

वैश्विक तनाव: पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्षों के कारण तेल और गैस की कीमतें बढ़ रही हैं। सरकारें जनता पर बोझ कम करने के लिए कर्ज लेकर सब्सिडी दे रही हैं.


महंगाई और ब्याज दरें: महंगाई को नियंत्रित करने के लिए केंद्रीय बैंकों ने ब्याज दरें बढ़ाई हैं, जिससे कर्ज चुकाना और नया कर्ज लेना महंगा हो गया है। इसके परिणामस्वरूप, वैश्विक GDP में ब्याज भुगतान का हिस्सा 2% से बढ़कर 3% हो गया है.


आमदनी अठन्नी, खर्चा रुपया: कई देश बजट घाटे में चल रहे हैं, जिससे उनकी आय कम और खर्च अधिक है। इस अंतर को पाटने के लिए सरकारें उधार ले रही हैं, जिसका सबसे बड़ा असर गरीब और विकासशील देशों पर पड़ सकता है.


भारत की स्थिति

IMF ने भारत को इस संकट के बीच एक सकारात्मक उदाहरण बताया है। भारत ने अपने प्राथमिक खर्चों को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया है, जिससे उसकी राजकोषीय स्थिति में सुधार हुआ है। जबकि अमेरिका का कर्ज 2031 तक GDP का 142% और चीन का 127% तक पहुंचने का अनुमान है, भारत का कर्ज-GDP अनुपात वर्तमान में लगभग 84% है। भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि के कारण इसके कर्ज अनुपात में स्थिरता या कमी आने की संभावना है.