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ईरान-इजरायल संघर्ष से प्रभावित भारत का कोयला बाजार

ईरान और इजरायल के बीच चल रहे संघर्ष ने भारत के कोयला बाजार में कीमतों में भारी वृद्धि का कारण बना है। कोल इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी 2026 में हुई ई-नीलामी में कंपनियों ने मूल कीमत से 35% अधिक मूल्य चुकाया। गैस की कमी के कारण बिजली और स्टील कंपनियों ने कोयले का उपयोग बढ़ा दिया है। जानें इस संकट के पीछे के कारण और विभिन्न राज्यों में कोयले की कीमतों में बदलाव के आंकड़े।
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ईरान-इजरायल संघर्ष से प्रभावित भारत का कोयला बाजार

कोयला बाजार पर युद्ध का प्रभाव

ईरान और इजरायल के बीच चल रहे संघर्ष ने वैश्विक स्तर पर ईंधन संकट को जन्म दिया है, जिसका प्रत्यक्ष प्रभाव भारत के कोयला बाजार पर पड़ रहा है। कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी 2026 में आयोजित कोयले की ई-नीलामी में कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। इस नीलामी में कंपनियों ने सरकार द्वारा निर्धारित मूल कीमत से औसतन 35% अधिक मूल्य चुकाया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गैस और तेल की आपूर्ति में रुकावट के डर से भारतीय उद्योगों ने घरेलू कोयले को रिकॉर्ड दामों पर खरीदना शुरू कर दिया है।


गैस की कमी और कोयले की बढ़ती मांग

ईरान के संघर्ष के कारण खाड़ी देशों से एलएनजी (LNG) और कच्चे तेल की आपूर्ति पर संकट उत्पन्न हो गया है। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमतें बढ़ीं, तो भारत की बिजली और स्टील कंपनियों ने गैस के स्थान पर कोयले का उपयोग बढ़ा दिया। कोयले की बिक्री 'ई-नीलामी' के माध्यम से होती है, जिसमें कोल इंडिया अपना कोयला ऑनलाइन नीलामी के लिए प्रस्तुत करता है। फरवरी 2026 में इस नीलामी में कंपनियों के बीच कोयला प्राप्त करने की तीव्र प्रतिस्पर्धा देखी गई।


नीलामी के आंकड़े

कोल इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी 2026 में कुल 205.92 लाख टन कोयला नीलामी के लिए प्रस्तुत किया गया था। इस नीलामी में 'महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड' (MCL) को सबसे अधिक लाभ हुआ, जिसे अकेले फरवरी में 72.84 लाख टन कोयला आवंटित किया गया। ओडिशा में स्थित यह कंपनी बड़े पैमाने पर कोयला निकालती है ताकि देश के प्रमुख पावर प्लांट्स की आवश्यकताएं पूरी की जा सकें। इस कंपनी ने अपने कोयले का एक बड़ा हिस्सा बिजली क्षेत्र में निवेश किया है, ताकि गर्मियों में बिजली की कमी न हो। पूरे वर्ष (अप्रैल 2025 से फरवरी 2026) में कुल 884.04 लाख टन कोयला बेचा गया, जिसमें औसत मुनाफा 37% रहा।


कोयले की कीमतों में वृद्धि

भारत के विभिन्न राज्यों में कोयले की मांग और आपूर्ति के अनुसार कीमतें भिन्न रहीं। कोल इंडिया की रिपोर्ट से पता चलता है कि उत्तर-पूर्वी भारत (NEC) में कोयले की भारी कमी थी, जिसके कारण वहां कोयला अपनी मूल कीमत से 80% अधिक महंगा बिका। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे क्षेत्रों में भी मांग अधिक रही, जहां कोयला 43% से 47% महंगा हुआ। इसके विपरीत, ओडिशा में कोयले का स्टॉक अच्छा था, इसलिए वहां कीमतों में केवल 17% की वृद्धि हुई।


कम आपूर्ति और महंगी कीमतें

दूसरी ओर, नॉर्थ ईस्टर्न कोलफील्ड्स (NEC) को इस नीलामी में सबसे कम कोयला आवंटित किया गया, जहां फरवरी 2026 में केवल 0.15 लाख टन कोयला मिला। असम और उत्तर-पूर्व के क्षेत्रों में काम करने वाली इस कंपनी के पास कोयले की कमी के कारण सबसे अधिक मांग रही, जिससे कोयला अपनी मूल कीमत से 80% तक महंगा बिका। ईस्टर्न कोलफील्ड्स (ECL) को भी 6.30 लाख टन के साथ कम आवंटन मिला।


बिजली घरों की चुनौतियाँ

मार्च के अंत के साथ ही भारत में गर्मी बढ़ने लगी है, जिससे बिजली की मांग में तेजी आई है। ईरान के संघर्ष के कारण गैस से बिजली उत्पादन महंगा हो गया है, जिससे कोयले से चलने वाले बिजली घरों पर दबाव बढ़ गया है। बिजली कंपनियों को चिंता है कि यदि संघर्ष लंबा चला, तो कोयला और महंगा हो सकता है, इसलिए वे अपनी आवश्यकताओं के लिए पहले से स्टॉक जमा कर रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तनाव कम नहीं होता है, तो कीमतें और बढ़ सकती हैं।