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भारत में सोने का आयात: रिकॉर्ड वृद्धि और मूल्य में उछाल

भारत में सोने का आयात पिछले वर्ष में 24 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 71.98 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। इस लेख में जानें कि कैसे सोने की कीमतों में वृद्धि और मांग ने इस रिकॉर्ड को प्रभावित किया है। वित्त वर्ष 2025-26 में सोने का आयात मात्रा के हिसाब से घटा है, लेकिन मूल्य में वृद्धि जारी है। भारत, चीन के बाद, सोने का दूसरा सबसे बड़ा आयातक है।
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भारत में सोने का आयात: रिकॉर्ड वृद्धि और मूल्य में उछाल

सोने के आयात में अभूतपूर्व वृद्धि

भारत में सोने के गहनों और निवेश का चलन तेजी से बढ़ रहा है। चाहे शादी का अवसर हो या कोई अन्य शुभ दिन, भारतीय लोग सोने की खरीदारी पर काफी खर्च करते हैं। इसका प्रभाव सोने की कीमतों, मांग और आयात पर स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, भारत में सोने का आयात पिछले वर्ष में 24 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 71.98 अरब डॉलर तक पहुंच गया है, जो लगभग 6.69 लाख करोड़ रुपये के बराबर है।


आयात में वृद्धि के बावजूद मात्रा में कमी

भारत के वाणिज्य मंत्रालय ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में सोने का आयात 24 प्रतिशत बढ़ा है, जो अब तक का सबसे उच्चतम स्तर है। पिछले वित्त वर्ष 2024-25 में सोने का आयात 58 अरब डॉलर था, जबकि 2023-24 में यह 45.54 अरब डॉलर और 2022-23 में 35 अरब डॉलर था। इस प्रकार, तीन वर्षों में सोने का आयात लगभग दोगुना हो गया है, जबकि इसी अवधि में सोने की कीमतें भी दोगुनी से अधिक बढ़ गई हैं।


मात्रा में कमी, कीमतों में वृद्धि

वित्त वर्ष 2025-26 में सोने का आयात मात्रा के हिसाब से 4.76 प्रतिशत घटकर 721.03 टन रह गया, जो पिछले वर्ष 757.09 टन था। इसी समय, चांदी का आयात 150 प्रतिशत बढ़कर 12 अरब डॉलर हो गया। इन कीमती धातुओं के आयात में वृद्धि से देश का व्यापार घाटा बढ़कर 333.2 अरब डॉलर हो गया। मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, सोने की कीमतों में वृद्धि के कारण आयात मूल्य बढ़ा है, जबकि मात्रा में कमी आई है।


भारत का सोने का आयात

भारत, चीन के बाद, सोने का दूसरा सबसे बड़ा आयातक है, जिसका मुख्य उपयोग गहनों के निर्माण में होता है। स्विट्जरलैंड से आयात 11.36 प्रतिशत बढ़कर 24.27 अरब डॉलर हो गया है। भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार, चालू खाता घाटा दिसंबर तिमाही में बढ़कर 13.2 अरब डॉलर (जीडीपी का 1.3 प्रतिशत) हो गया है। हालांकि, चालू खाता घाटा अप्रैल-दिसंबर 2025 में घटकर 30.1 अरब डॉलर (जीडीपी का एक प्रतिशत) रह गया।