मिडिल-क्लास की बचत पर EMI और क्रेडिट का असर
बचत की चुनौती
आज के मिडिल-क्लास परिवारों में बचत करने की कोशिशें अक्सर विफल होती हैं। वे यह सोचते हैं कि 'मैं इतनी मेहनत से कमाता हूं, फिर भी अंत में मेरे पास कुछ नहीं बचता।' जब सैलरी खाते में आती है, तो कुछ ही दिनों में उसका बड़ा हिस्सा गायब हो जाता है।
बैंक के कटने वाले खर्चे
बैंक अपने आप से EMI का ऑटो-डेबिट कर लेता है, और इसके अलावा बीमा, बिजली, गैस, मोबाइल रिचार्ज, और स्ट्रीमिंग सेवाओं के लिए भी पैसे कट जाते हैं। फूड डिलीवरी, कैब सेवाएं, ऑनलाइन खरीदारी और कोर्स सब्सक्रिप्शन के लिए भी पैसे खर्च होते हैं। इस तरह, सैलरी आते ही पैसे का खत्म होना आम बात बन गई है।
EMI का प्रभाव
EMI (समान मासिक किस्त) का बोझ बढ़ता जा रहा है। आज लगभग 70% आईफोन और 80% नई कारें EMI पर खरीदी जाती हैं, जिसमें मिडिल-क्लास का बड़ा हिस्सा शामिल है। कई परिवारों की आय का 30-33% हर महीने सिर्फ EMI चुकाने में चला जाता है।
क्रेडिट कार्ड और फिनटेक लोन
क्रेडिट कार्ड पर बकाया और डिफॉल्टर्स की संख्या में वृद्धि हो रही है। कई उपयोगकर्ता अपने क्रेडिट कार्ड का पूरा बिल नहीं चुका पाते, जिससे बकाया राशि पर ब्याज बढ़ता है। फिनटेक लोन ऐप्स ने भी छोटे लोन लेने का नया ट्रेंड शुरू किया है, जिससे मिडिल-क्लास की बचत तेजी से घट रही है।
SIP और निवेश का बढ़ता चलन
SIP (सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) में निवेश पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ा है। 2023 में SIP का कुल निवेश 1.84 लाख करोड़ था, जो 2024 में बढ़कर 2.68 लाख करोड़ और 2025 में 3.34 लाख करोड़ तक पहुंच गया। यह दर्शाता है कि मिडिल-क्लास का पैसा कर्ज चुकाने के साथ-साथ भविष्य के निवेश में भी बंधा हुआ है।
बचत में कमी, दिखावे में वृद्धि
EMI, क्रेडिट कार्ड, फिनटेक लोन और SIP ने मिडिल-क्लास की बचत को इस तरह प्रभावित किया है कि अधिकांश पैसा या तो कर्ज चुकाने में जा रहा है या भविष्य के लिए सुरक्षित किया जा रहा है। इसका परिणाम यह है कि जीवन बाहरी रूप से आधुनिक दिखता है, लेकिन अंदर से कर्ज और बिलों का दबाव बढ़ता जा रहा है।
