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Zomato ने बढ़ाए प्लेटफॉर्म शुल्क: ग्राहकों पर पड़ेगा 2.40 रुपये का अतिरिक्त बोझ

Zomato has recently raised its platform fees from ₹12.50 to ₹14.90 per order, adding an extra burden of ₹2.40 on customers. This decision comes at a time when customers are already grappling with delivery charges and taxes. The competitive landscape of the food delivery market is shifting, with Swiggy maintaining similar fees and new entrants like Rapido introducing innovative services. As operational costs rise due to increasing fuel prices, companies are forced to adjust their fees, impacting customer expenses significantly. This trend may lead consumers to seek more affordable and transparent options in the market.
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Zomato ने बढ़ाए प्लेटफॉर्म शुल्क: ग्राहकों पर पड़ेगा 2.40 रुपये का अतिरिक्त बोझ

ऑनलाइन फूड डिलीवरी में नया शुल्क बदलाव


फूड डिलीवरी क्षेत्र में एक बार फिर से कीमतों में बदलाव की चर्चा तेज हो गई है। जोमेटो ने अपने प्लेटफॉर्म शुल्क को 12.50 रुपये से बढ़ाकर 14.90 रुपये प्रति ऑर्डर कर दिया है। यह निर्णय ग्राहकों के लिए निराशाजनक साबित हो रहा है, क्योंकि वे पहले से ही डिलीवरी चार्ज, टैक्स और अन्य शुल्कों का सामना कर रहे हैं। कंपनियां बढ़ती प्रतिस्पर्धा और लागत के दबाव के बीच अपने लाभ और सेवा के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही हैं।


ग्राहकों पर बढ़ा बोझ

इस नई वृद्धि के तहत ग्राहकों पर प्रति ऑर्डर 2.40 रुपये का अतिरिक्त बोझ डाला गया है। यह राशि टैक्स से पहले की है, जिससे अंतिम बिल में और भी वृद्धि देखने को मिलेगी। इससे पहले, कंपनी ने सितंबर 2025 में भी अपने प्लेटफॉर्म शुल्क में इजाफा किया था। लगातार हो रही इन बढ़ोतरी से यह स्पष्ट है कि कंपनी अपने राजस्व को बढ़ाने और संचालन के खर्चों को संभालने के लिए नए उपाय खोज रही है।


प्रतिस्पर्धा का नया दौर

फूड डिलीवरी बाजार में प्रतिस्पर्धा तेजी से बदल रही है। स्विग्गी भी लगभग इसी स्तर का प्लेटफॉर्म शुल्क ले रही है, जिससे दोनों कंपनियों के बीच सीधी टक्कर बनी हुई है। वहीं, रैपिडो ने 'Ownly' नाम की नई सेवा शुरू कर इस प्रतिस्पर्धा को और भी दिलचस्प बना दिया है। कंपनी का दावा है कि इस सेवा में ग्राहकों और रेस्टोरेंट से अतिरिक्त प्लेटफॉर्म फीस नहीं ली जाएगी, जो यूजर्स को आकर्षित कर सकता है।


डिलीवरी कंपनियों की बढ़ती लागत

दूसरी ओर, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने डिलीवरी कंपनियों की लागत में इजाफा कर दिया है। महंगे ईंधन के कारण डिलीवरी पार्टनर्स का खर्च बढ़ता है, जिसका सीधा असर कंपनियों के संचालन पर पड़ता है। इस स्थिति में शुल्क बढ़ाना कंपनियों के लिए एक मजबूरी और संतुलन साधने की रणनीति दोनों माना जा रहा है।


ग्राहकों की जेब पर असर

इस बदलाव का सबसे बड़ा प्रभाव ग्राहकों की जेब पर पड़ेगा। हर ऑर्डर के साथ बढ़ती फीस और टैक्स मिलाकर कुल खर्च पहले से अधिक हो जाएगा। ऐसे में ग्राहक अब किफायती और पारदर्शी सेवाओं की तलाश में नए विकल्पों की ओर रुख कर सकते हैं, जिससे भविष्य में बाजार का संतुलन बदलने की संभावना भी बढ़ गई है।