Newzfatafatlogo

अक्षय तृतीया पर सोने की मांग में गिरावट: निवेश के नए विकल्प

इस वर्ष अक्षय तृतीया पर सोने की मांग में अप्रत्याशित गिरावट आई है, जो पिछले साल की तुलना में 30 प्रतिशत कम है। सोने की बढ़ती कीमतों के कारण उपभोक्ता अब गहनों की खरीदारी से दूर हो रहे हैं और हल्के सिक्कों तथा गोल्ड ईटीएफ की ओर रुख कर रहे हैं। जानें कि कैसे यह बदलाव सोने को एक परंपरा से हटकर निवेश का हिस्सा बना रहा है और क्या अब भी सोना खरीदना सही है।
 | 
अक्षय तृतीया पर सोने की मांग में गिरावट: निवेश के नए विकल्प

अक्षय तृतीया पर सोने की मांग में कमी


भारत में अक्षय तृतीया, जो कि एक महत्वपूर्ण त्योहार है, इस बार सोने की मांग में अप्रत्याशित कमी का सामना कर रहा है। पिछले वर्ष की तुलना में सोने की कीमतों में 63 प्रतिशत की वृद्धि के कारण, आम उपभोक्ताओं ने गहनों की खरीदारी से दूरी बना ली है। हालांकि, सोने के सिक्कों और गोल्ड ईटीएफ जैसे निवेश विकल्पों की ओर रुझान बढ़ा है। ज्वैलर्स का कहना है कि दक्षिण भारत को छोड़कर अन्य राज्यों में दुकानों पर भीड़ कम रही। रिपोर्ट के अनुसार, इस बार अक्षय तृतीया पर सोने की खरीदारी में 30 प्रतिशत की गिरावट आई है।


त्योहारों की बजाय कीमतों पर ध्यान

इस वर्ष अक्षय तृतीया पर सोने की मांग में कमी यह दर्शाती है कि अब खरीदार त्योहारों की बजाय कीमतों पर अधिक ध्यान दे रहे हैं। भारतीय बुलियन एसोसिएशन के सुरेंद्र मेहता के अनुसार, देशभर में खरीदारी में कमी आई है। ग्राहकों ने भारी गहनों के बजाय हल्के सिक्कों को प्राथमिकता दी है, क्योंकि इन पर मेकिंग चार्ज नहीं लगता और इन्हें तुरंत बेचा जा सकता है। ज्वैलर्स ने ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए कारीगरी शुल्क में छूट दी, लेकिन इसका प्रभाव सीमित रहा।


गहनों की मांग में गिरावट

विश्व स्वर्ण परिषद के आंकड़ों के अनुसार, 2025 में भारत में गहनों की मांग में 24 प्रतिशत की कमी आई, जबकि निवेश की मांग 17 प्रतिशत बढ़कर 2013 के बाद के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। यह दर्शाता है कि सोना अब केवल त्योहारी खरीदारी तक सीमित नहीं रह गया है। लोग अब पूरे वर्ष कीमतों पर नजर रखते हैं और गिरावट के समय खरीदारी करते हैं। यह बदलाव यह संकेत देता है कि सोना अब एक परंपरा से हटकर निवेश पोर्टफोलियो का हिस्सा बन गया है।


क्या सोना खरीदना अभी भी सही है?

लॉन्ग टेल वेंचर्स के परमदीप सिंह का कहना है कि अक्षय तृतीया पर लोग अक्सर सोने में अधिक निवेश कर देते हैं, जो उचित नहीं है। वर्तमान कीमतों पर सोने को पोर्टफोलियो का 5-10 प्रतिशत ही रखना चाहिए। युवा निवेशकों के लिए गहनों के मुकाबले गोल्ड ईटीएफ या डिजिटल गोल्ड बेहतर विकल्प हैं। वहीं, फाइनैटवर्क के सौरभ बंसल के अनुसार, त्योहार पर भावनात्मक खरीदारी ठीक है, लेकिन निवेश का निर्णय एसेट एलोकेशन पर आधारित होना चाहिए। यदि पोर्टफोलियो में सोना पहले से मौजूद है, तो अतिरिक्त खरीदारी की आवश्यकता नहीं है।