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अनिल अंबानी को उच्चतम न्यायालय से कानूनी राहत नहीं मिली

रिलायंस कम्युनिकेशंस के पूर्व चेयरमैन अनिल अंबानी को उच्चतम न्यायालय से कानूनी राहत नहीं मिली है। अदालत ने उनकी याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिससे बैंकों को उनके खातों को धोखाधड़ी घोषित करने की प्रक्रिया जारी रखने की अनुमति मिली। जानें इस मामले में अदालत का क्या कहना है और आगे की कानूनी प्रक्रिया क्या होगी।
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अनिल अंबानी को उच्चतम न्यायालय से कानूनी राहत नहीं मिली

अनिल अंबानी की याचिकाओं पर उच्चतम न्यायालय का निर्णय

रिलायंस कम्युनिकेशंस के पूर्व चेयरमैन अनिल अंबानी को हाल ही में एक महत्वपूर्ण कानूनी झटका लगा है। उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को उनकी उन याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिनमें उन्होंने बंबई उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसने बैंकों को उनके खातों को 'धोखाधड़ी' घोषित करने की प्रक्रिया जारी रखने की अनुमति दी थी।


प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने अंबानी को बैंकों द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस के खिलाफ उच्च न्यायालय की एकल पीठ में अपनी याचिका जारी रखने की अनुमति दी। पीठ ने एकल पीठ से अनुरोध किया कि वह इस मामले में शीघ्र निर्णय ले।


उच्च न्यायालय के आदेश की चुनौती

उच्चतम न्यायालय ने अंबानी द्वारा दायर तीन अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान यह आदेश दिया। इन याचिकाओं में उन्होंने उच्च न्यायालय की खंडपीठ के 23 फरवरी के आदेश को चुनौती दी थी, जिसने एकल पीठ के उस अंतरिम आदेश को रद्द कर दिया था, जिसमें उनके और रिलायंस कम्युनिकेशंस के खिलाफ धोखाधड़ी के आरोपों पर रोक लगाई गई थी।


इसके अलावा, खंडपीठ ने तीन सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और ऑडिट कंपनी बीडीओ इंडिया एलएलपी द्वारा दायर अपीलों को स्वीकार कर लिया। एकल पीठ के आदेश में इंडियन ओवरसीज बैंक, आईडीबीआई बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा द्वारा की जा रही सभी कार्रवाइयों पर रोक लगाई गई थी।


कानूनी प्रक्रिया और बैंकिंग दिशानिर्देश

अदालत ने कहा कि यह कार्रवाई कानूनी रूप से त्रुटिपूर्ण 'फॉरेंसिक ऑडिट' पर आधारित है और भारतीय रिजर्व बैंक के अनिवार्य दिशानिर्देशों का उल्लंघन करती है। अंबानी ने एकल पीठ के समक्ष इंडियन ओवरसीज बैंक, आईडीबीआई बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस को चुनौती दी थी, जिसमें उनके और रिलायंस कम्युनिकेशंस के खातों को धोखाधड़ी वाले खाते घोषित करने की मांग की गई थी।