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अप्रैल 2026 में GST संग्रह ने तोड़ा रिकॉर्ड, जानें इसके पीछे की वजहें

अप्रैल 2026 में भारत के GST संग्रह ने नया कीर्तिमान स्थापित किया है, जो 2.43 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। यह वृद्धि पिछले साल की तुलना में 8.7 प्रतिशत अधिक है, जो आर्थिक गतिविधियों में मजबूती का संकेत देती है। घरेलू लेन-देन और आयात से मिलने वाले राजस्व में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। जानें इस वृद्धि के पीछे के कारण और इसके प्रभाव पर विशेषज्ञों की राय।
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अप्रैल 2026 में GST संग्रह ने तोड़ा रिकॉर्ड, जानें इसके पीछे की वजहें

अप्रैल 2026 का GST संग्रह


अप्रैल 2026 भारत की आर्थिक स्थिति के लिए एक महत्वपूर्ण समय रहा है। इस महीने में वस्तु एवं सेवा कर (GST) संग्रह ने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल में कुल GST संग्रह 2.43 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो अब तक का सबसे ऊंचा आंकड़ा है। मार्च में यह आंकड़ा लगभग 2 लाख करोड़ रुपये था। पिछले साल के अप्रैल की तुलना में इसमें 8.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो आर्थिक गतिविधियों में मजबूती का संकेत है।


पिछले साल की तुलना

पिछले वर्ष, अप्रैल 2025 में GST संग्रह लगभग 2.23 लाख करोड़ रुपये था, जो उस समय का रिकॉर्ड था। लेकिन इस वर्ष, अप्रैल में यह आंकड़ा 2.43 लाख करोड़ रुपये के पार चला गया। यह वृद्धि दर्शाती है कि देश में व्यापार और खपत में सुधार हो रहा है, विशेष रूप से साल के अंत में हुई बिक्री और लेन-देन का प्रभाव अप्रैल के आंकड़ों में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।


घरेलू और आयात से राजस्व

घरेलू और आयात से मिलने वाले राजस्व में अंतर


अप्रैल में घरेलू लेन-देन से प्राप्त ग्रॉस राजस्व 4.3 प्रतिशत बढ़कर 1.85 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया। वहीं, आयात से प्राप्त GST संग्रह में 25.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो 57,580 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। ये आंकड़े बताते हैं कि देश में खपत में स्थिर वृद्धि हो रही है, जबकि आयात से जुड़े लेन-देन में तेजी आई है।


रिफंड और नेट कलेक्शन

रिफंड और नेट कलेक्शन की स्थिति


अप्रैल में सरकार ने रिफंड के रूप में 31,793 करोड़ रुपये जारी किए, जो पिछले वर्ष की तुलना में 19.3 प्रतिशत अधिक है। रिफंड को समायोजित करने के बाद, नेट GST संग्रह लगभग 2.11 लाख करोड़ रुपये रहा, जिसमें 7.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई। यह दर्शाता है कि सरकार न केवल संग्रह बढ़ा रही है, बल्कि समय पर रिफंड भी दे रही है।


वित्त वर्ष 2025-26 का प्रदर्शन

पूरे वित्त वर्ष 2025-26 का प्रदर्शन


वित्त वर्ष 2025-26 के आंकड़ों के अनुसार, ग्रॉस GST संग्रह 8.3 प्रतिशत बढ़कर 22.27 लाख करोड़ रुपये हो गया। वहीं, नेट कलेक्शन 7.1 प्रतिशत बढ़कर 19.34 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। राज्यों में महाराष्ट्र, कर्नाटक और गुजरात जैसे प्रमुख औद्योगिक राज्यों का इसमें महत्वपूर्ण योगदान रहा है।


स्टॉक क्लियरेंस का प्रभाव

स्टॉक क्लियरेंस का असर


टैक्स विशेषज्ञों का मानना है कि अप्रैल में GST संग्रह का अधिक होना सामान्य है। टैक्स और कंसल्टिंग फर्म AKM Global के इकेश नागपाल के अनुसार, मार्च में साल के अंत के कारण कंपनियां अधिक बिक्री और स्टॉक क्लियरेंस करती हैं, जिसका प्रभाव अप्रैल के आंकड़ों में दिखाई देता है।


EY India के टैक्स पार्टनर सौरभ अग्रवाल का कहना है कि GST संग्रह में यह वृद्धि भारत में मजबूत खपत को दर्शाती है। हालांकि, उन्होंने घरेलू और आयात से मिलने वाले कलेक्शन के बीच के अंतर पर ध्यान देने की आवश्यकता बताई। उनके अनुसार, वैश्विक माहौल को देखते हुए नीति ढांचे की समीक्षा आवश्यक है, ताकि घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिल सके। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार द्वारा रिफंड को तेजी से प्रोसेस करना सकारात्मक संकेत है, जो बाजार में नकदी प्रवाह को बनाए रखने में मदद करता है।