अमेरिका-ईरान तनाव से क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ी
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 126 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंची, और इसके और बढ़ने की संभावना है।
बिजनेस डेस्क : अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष का प्रभाव केवल इन देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वैश्विक स्तर पर भी महसूस किया जा रहा है। इस संघर्ष का सबसे बड़ा प्रभाव होर्मुज जलडमरूमध्य के बाधित होने से पेट्रोल, डीजल और गैस की आपूर्ति में कमी आई है, जिससे कई देशों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
इस संघर्ष के कारण कच्चे तेल की आपूर्ति और उत्पादन पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। इस सप्ताह, वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें 126 डॉलर प्रति बैरल के चार साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गईं। हालांकि, इसके बाद थोड़ी गिरावट आई, लेकिन कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई हैं।
महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य
होर्मुज जलडमरूमध्य विश्व के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है, जो फारस की खाड़ी को वैश्विक बाजारों से जोड़ता है। यह लगभग 20% वैश्विक तेल व्यापार और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की महत्वपूर्ण मात्रा को संभालता है। इसके अलावा, अमेरिका और ईरान के नेताओं के बीच लगातार बयानबाजी से आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। पिछले साल कच्चे तेल की कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल थी, जबकि इस महीने इसका औसत 114 डॉलर प्रति बैरल को पार कर गया है।
तेल कंपनियों को हो रहा नुकसान
अप्रैल 2022 से देश में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें स्थिर हैं, जबकि इस दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा गया है। पेट्रोलियम मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, वैश्विक कीमतों में वृद्धि के बावजूद, पंप की कीमतें लगभग चार वर्षों तक स्थिर रहने के कारण सरकारी ईंधन खुदरा विक्रेताओं को पेट्रोल पर लगभग 20 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर लगभग 100 रुपये प्रति लीटर का भारी नुकसान हो रहा है।
हालांकि, अतीत में जब कच्चे तेल की कीमतें गिरी थीं, तब सरकारी तेल कंपनियों ने अच्छा मुनाफा कमाया था, जिसका उपयोग उन्होंने दरें बढ़ने पर होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए किया।
