अमेरिका की नई टैरिफ नीति: भारत और चीन पर बढ़ सकता है दबाव
अमेरिका की टैरिफ नीति का प्रभाव
अमेरिका का रूख अमेरिका ने पिछले वर्ष से नई टैरिफ नीति के तहत कई देशों पर आर्थिक दबाव बनाने का प्रयास किया है। इस नीति के अंतर्गत उन देशों को निशाना बनाया गया है जो रूस से कच्चा तेल खरीदते हैं या अन्य व्यापारिक संबंध रखते हैं। भारत और चीन, जो रूस के प्रमुख व्यापारिक साझेदार हैं, ने युद्ध के दौरान रियायती दरों पर रूस से सबसे अधिक कच्चा तेल खरीदा है। अमेरिका ने भारत पर उच्च टैरिफ लागू कर दिए हैं, जबकि चीन को इस मामले में छूट मिली हुई है।
ट्रंप का संभावित बड़ा निर्णय
अमेरिका की सख्ती भारत और चीन के खिलाफ और बढ़ सकती है। रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक द्विदलीय विधेयक को मंजूरी दी है, जिसके तहत रूस से तेल और यूरेनियम खरीदने वाले देशों को दंडित किया जा सकेगा। ग्राहम ने सोशल मीडिया पर कहा कि यह विधेयक अगले सप्ताह वोटिंग के लिए पेश किया जा सकता है।
टैरिफ में संभावित वृद्धि
इस प्रस्तावित कानून के अनुसार, अमेरिका भारत और चीन जैसे देशों पर आयात शुल्क 500 प्रतिशत तक बढ़ा सकता है। अमेरिका का आरोप है कि ये तेल खरीद रूस-यूक्रेन युद्ध को वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है। यह विधेयक ग्राहम और डेमोक्रेटिक सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल द्वारा प्रायोजित है। ग्राहम का कहना है कि इससे ट्रंप को भारत, चीन और ब्राजील जैसे देशों पर दबाव बनाने की शक्ति मिलेगी ताकि वे रूसी तेल खरीदना बंद करें।
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